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झुंझुनूं मेडिकल कॉलेज बिना स्थायी नेतृत्व

राजस्थान की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में वर्षों से चली आ रही एक बड़ी खामी अब उजागर हो गई है। RAJMES (राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी) के अधीन झुंझुनूं सहित प्रदेश के 22 मेडिकल कॉलेजों में से 11 कॉलेज ऐसे हैं, जहां प्रिंसिपल और सुपरिटेंडेंट के पदों पर ब

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अब मेडिकल एजुकेशन विभाग ऐसे सभी अपात्र अधिकारियों को हटाने की तैयारी कर चुका है। इसके लिए पूरे प्रदेश से 57 योग्य डॉक्टरों की सूची तैयार की गई है। इन डॉक्टरों को 2 अगस्त को जयपुर बुलाया गया है, जहां विभागीय सचिव उनके साथ बैठक कर कॉलेजों में नई नियुक्तियों को अंतिम रूप देंगे।

झुंझुनूं मेडिकल कॉलेज: 2019 से बिना स्थायी नेतृत्व, संकट में मान्यता

झुंझुनूं मेडिकल कॉलेज की स्थापना वर्ष 2019 में हुई थी। फिलहाल यहां कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. राकेश साबू कॉलेज का प्रशासनिक कार्य संभाल रहे हैं, लेकिन स्थायी प्रिंसिपल की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। वहीं, जिला अस्पताल जो मेडिकल कॉलेज से अटैच है, वहां सुपरिटेंडेंट का पद रिक्त है। वर्तमान में पीएमओ (प्रमुख चिकित्सा अधिकारी) को ही सुपरिटेंडेंट का चार्ज सौंपा गया है।

झुंझुनूं की स्थिति को विभाग ने गंभीर माना है क्योंकि कॉलेज में MBBS की 100 सीटें हैं और अगस्त से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है। ऐसे में प्रशासनिक अस्थिरता से छात्रों की शिक्षा और कॉलेज की मान्यता दोनों पर असर पड़ सकता है।

NMC की गाइडलाइन की खुली अनदेखी: योग्यता दरकिनार, ‘अपात्र’ हावी

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की गाइडलाइंस के अनुसार, किसी भी मेडिकल कॉलेज में प्रिंसिपल बनने के लिए जरूरी है कि संबंधित डॉक्टर मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हो और उसके पास कम से कम 5 साल का अनुभव हो। सुपरिटेंडेंट के लिए भी प्रशासनिक अनुभव और विशेषज्ञता अनिवार्य है।

लेकिन RAJMES के रिकॉर्ड बताते हैं कि झुंझुनूं, सीकर, नागौर, हनुमानगढ़ और बांसवाड़ा मेडिकल कॉलेजों में नियुक्त डॉक्टर इन मानकों को पूरा नहीं करते। इसी तरह चूरू, भरतपुर, पाली, बाड़मेर, भीलवाड़ा और सीकर में सुपरिटेंडेंट पद पर बैठे डॉक्टरों के पास भी उपयुक्त योग्यता नहीं है।

ये सभी नियुक्तियां या तो राजनीतिक सिफारिश, या फिर प्रशासनिक सहूलियत के आधार पर की गई थीं। लेकिन अब इन नियुक्तियों की समीक्षा कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

सिर्फ 8 कॉलेजों में नियमित सुपरिटेंडेंट, 14 में’कामचलाऊ’ व्यवस्था

राज्य में RAJMES के 22 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 8 कॉलेजों में ही नियमित सुपरिटेंडेंट तैनात हैं। शेष 14 कॉलेजों में पीएमओ को अतिरिक्त चार्ज देकर काम चलाया जा रहा है।

इन कॉलेजों में झुंझुनूं के अलावा चित्तौड़गढ़, बूंदी, करौली, दौसा, सिरोही, अलवर, श्रीगंगानगर, नागौर, बांसवाड़ा, बारां, सवाईमाधोपुर और हनुमानगढ़ शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज और उससे अटैच अस्पतालों का संचालन जब अस्थायी नेतृत्व के भरोसे चल रहा हो, तो वहां गुणवत्तापूर्ण क्लिनिकल ट्रेनिंग और प्रभावी प्रशासन की उम्मीद करना मुश्किल है। यह सीधे तौर पर मेडिकल छात्रों के भविष्य पर असर डालता है।

2 अगस्त को निर्णायक बैठक: झुंझुनूं में बदलाव तय, NEET काउंसलिंग के बीच होगी नियुक्तियां

मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने जिन 57 डॉक्टरों की सूची तैयार की है, वे सभी NMC के मानकों के अनुरूप हैं। इन्हें 2 अगस्त को जयपुर बुलाया गया है, जहां RAJMES और विभागीय सचिव की मौजूदगी में कॉलेज-वार नियुक्ति की योजना बनाई जाएगी। झुंझुनूं कॉलेज के लिए भी योग्य और अनुभवी प्रिंसिपल तथा सुपरिटेंडेंट की नियुक्ति की पूरी संभावना है।

झुंझुनूं के मौजूदा कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. राकेश साबू ने भास्कर से बातचीत में कहा, “स्थायी नियुक्ति का प्रोसेस विभागीय स्तर पर जारी है। जब तक नई नियुक्ति नहीं होती, हम चार्ज संभाल रहे हैं।”

वर्तमान में NEET-UG की काउंसलिंग चल रही है और अगस्त के अंत से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होगा। ऐसे में यदि NMC के मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले अधिकारी कॉलेजों में पदस्थ हैं, तो कॉलेज की मान्यता तक रद्द हो सकती है। इसी वजह से इन नियुक्तियों में तेजी लाई जा रही है।



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