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झुंझुनूं के राजस्व कर्मियों का कार्य बहिष्कार

लालसोट में तहसीलदार के साथ हुई मारपीट की घटना ने पूरे प्रदेश के राजस्व विभाग के कर्मचारियों में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इस मामले को लेकर झुंझुनूं जिले में बुधवार से राजस्व कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया। तहसील और उपपंजीयन कार्यालयों में सभी

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लालसोट मारपीट कांड से आक्रोशित, तहसीलदार के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना

लालसोट मारपीट कांड से आक्रोशित, तहसीलदार के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना

धरने का नेतृत्व तहसीलदार महेंद्र मूंड, उपपंजीयक कुलदीप और संयुक्त कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष उम्मेद सिंह महला कर रहे हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में राजस्व कर्मचारी शामिल होकर नारेबाजी कर रहे हैं। कर्मचारियों ने लालसोट मारपीट प्रकरण में नामजद आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है और साफ कहा है कि जब तक दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक कार्य बहिष्कार और धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।

धरने के दौरान तहसीलदार महेंद्र मूंड ने कहा कि राजस्व अधिकारी और कर्मचारी पूरी ईमानदारी से जनसेवा में लगे रहते हैं, लेकिन जिस तरह लालसोट में तहसीलदार के साथ मारपीट की गई, वह बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि यह घटना न सिर्फ एक अफसर पर हमला है, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश है। अगर कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो कोई भी अधिकारी ईमानदारी से काम नहीं कर पाएगा।

तहसीलदार कार्यालय में धरना प्रदर्शन जारी

तहसीलदार कार्यालय में धरना प्रदर्शन जारी

उपपंजीयक कुलदीप ने कहा कि राजस्व विभाग का हर कर्मचारी न्याय दिलाने तक संघर्षरत रहेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं कर्मचारियों का मनोबल तोड़ती हैं। अगर प्रशासन ने सख्ती से कार्रवाई नहीं की तो इसका असर पूरे प्रदेश के कामकाज पर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और जिले भर में कामकाज ठप हो जाएगा।

संयुक्त कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष उम्मेद सिंह महला ने कहा कि लालसोट की घटना से साबित हो गया है कि सरकार और प्रशासन राजस्व कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार घटनाओं के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाए जाएं।

धरने के दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि दोषियों को बचाने की कोशिश की गई तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। धरना स्थल पर उपस्थित कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि यह संघर्ष सिर्फ एक तहसीलदार के लिए नहीं है, बल्कि पूरे विभाग और उसकी गरिमा की रक्षा के लिए है।

इधर कार्य बहिष्कार के कारण तहसील और उपपंजीयन कार्यालयों में आने वाले सैकड़ों लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। भूमि संबंधित कार्य, रजिस्ट्रियां, नामांतरण, प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गईं। ग्रामीण इलाकों से आए लोग घंटों परेशान होते रहे, लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ा।



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