झुंझुनूं की डाइट का नेतृत्व कार्यक्रम के लिए चयन
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने झुंझुनू की डाइट (जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान) को एक विशेष नेतृत्व विकास कार्यक्रम के लिए चुना है। ‘स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप’ (SOUL), अहमदाबाद द्वारा संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य डाइट प्राचार्यों की क्षमताओं

झुंझुनूं की डाइट का नेतृत्व कार्यक्रम के लिए चयन, देशभर में बढ़ा सम्मान, डाइट प्राचार्यों के लिए विशेष कार्यक्रम
नेतृत्व कार्यक्रम का उद्देश्य
इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य डाइट प्राचार्यों की नेतृत्व क्षमता और प्रबंधन कौशल को बेहतर बनाना है। डाइट की प्रधानाचार्य सुमित्रा झाझड़िया ने बताया कि कार्यक्रम के शुरुआती चरण में एक ‘आवश्यकता-विश्लेषण अभ्यास’ होगा। यह प्रत्येक डाइट की खास चुनौतियों और प्राथमिकताओं को समझने में मदद करेगा। इस विश्लेषण के आधार पर ही नेतृत्व विकास कार्यक्रम को तैयार किया जाएगा, ताकि यह हर संस्थान की ज़रूरत के हिसाब से सटीक हो।
चयन का आधार: नवाचार और उत्कृष्टता
‘स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप’ की टीम ने डाइट झुंझुनू का दौरा किया। टीम के निदेशक, प्रणव पटेल और उनकी टीम ने संस्थान के नवाचारों, कार्यप्रणाली और शैक्षणिक गतिविधियों का गहराई से अवलोकन किया। प्रभागाध्यक्ष प्रमेन्द्र कुल्हार ने बताया कि टीम ने डाइट झुंझुनू द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों और भौतिक विकास की विशेष रूप से सराहना की।
बदलते परिवेश में मजबूत नेतृत्व की ज़रूरत
प्रमेन्द्र कुल्हार ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में तेज़ी से बदलाव हो रहे हैं। नई डिजिटल तकनीक, शिक्षण पद्धतियां और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन शिक्षा की परिभाषा बदल रहे हैं। ऐसे में, डाइट्स को भी इन बदलावों के अनुरूप ढालना ज़रूरी है। इसके लिए, शिक्षकों और छात्रों को अपडेट रखने के लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि ऐसे नेतृत्व कार्यक्रम समय-समय पर आवश्यक हैं।
एनईपी 2020 और डाइट की नई भूमिका
एसएमडी प्रभागाध्यक्ष दीपेंद्र बुड़ानिया ने इस चयन को पूरे शैक्षणिक समुदाय के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने डाइट की भूमिका को और भी व्यापक बना दिया है। अब डाइट्स को केवल शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि 21वीं सदी के कौशल और नवाचारों के केंद्र के रूप में काम करना है।
इस कार्यक्रम से डाइट प्राचार्यों में निम्नलिखित क्षमताएं विकसित होंगी:
ठोस नेतृत्व और प्रबंधन कौशल
संसाधनों का प्रभावी उपयोग
टीम प्रबंधन और दीर्घकालिक योजना बनाने की योग्यता
नवाचारों को समझना और लागू करना
स्थानीय चुनौतियों का समाधान खोजना
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