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तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान मार्च 2023 से मई 2023 के बीच जयपुर के दूदू में सरकारी जमीन पर फर्जी तरीके से पट्‌टे काटने का मामला सामने आया है।

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पंचायत से निकाय में बदलने के दौरान तत्कालीन सरपंच कमलेश चौधरी और सचिव रतन शर्मा ने नियम विरूद्ध सरपंच के परिजनों और कर्मचारियों को 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की जमीन के पट्‌टे बांट दिए।

भास्कर ने दूदू ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड खंगाले तो सामने आया कि दूदू में कांकरिया नाले के पास स्थित एडीएम दफ्तर के पास सालों से खाली पड़ी सरकारी जमीन के आवासीय पट्टे काटे गए थे।

सरपंच और उनके परिजनों के अलावा पंचायत के कर्मचारी धनराज प्रजापति के नाम पर भी 291 गज की सरकारी जमीन का पट्टा जारी किया गया।

चौंकाने वाली बात ये है कि तीन दर्जन से ज्यादा पट्टों में रामप्रसाद और जगदीश चौधरी गवाह हैं। दोनों सरपंच के काका ससुर हैं।

तत्कालीन सरपंच के देवर कालूराम के नाम से जारी पट्‌टा। आवास बताकर भूखंड का पट्‌टा जारी किया गया।

तत्कालीन सरपंच के देवर कालूराम के नाम से जारी पट्‌टा। आवास बताकर भूखंड का पट्‌टा जारी किया गया।

इस तरह तोड़े नियम

  • नियम : राजस्थान पंचायत राज अधिनियम, 1996 की धारा 157(1) पुराने मकानों के नियमितीकरण से संबंधित है। ग्राम पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि पर बने मकानों के पट्टे जारी करने के लिए यह नियम बना है। इस नियम के तहत वर्ष 1996 या सरकार द्वारा जारी कटऑफ डेट तक बने मकानों को न्यूनतम दर पर पट्टा जारी करना होता है। अगर मकान का क्षेत्रफल 300 वर्ग गज से अधिक होता है तो जमीन की डीएलसी दर का 25% शुल्क जमा करके पंचायत पट्टा जारी करती है।
  • मनमानी : दूदू के मामले में खाली जमीन पर आनन-फानन में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पट्‌टे जारी किए गए। रजिस्ट्री तक करा ली। भास्कर के पास इन पट्टों की रजिस्ट्री की कॉपी मौजूद है।
  • नियम : जिसके नाम पर निर्मित मकान का पट्टा जारी किया जा रहा है उनके पास पहले से कोई भूमि,भूखंड या भवन नहीं होना चाहिए।
  • मनमानी : अवैध पट्टे लेने वाले अधिकतर व्यक्तियों के नाम पर पहले से कृषि भूमि है जिसका रिकाॅर्ड भी भास्कर के पास मौजूद है।

भास्कर की पड़ताल में मिली मौके पर खाली जमीन

यह सभी पट्टे 50 सालों पुरानी बसावट बताकर जारी किए गए थे। मामले की पड़ताल के लिए भास्कर टीम मौके पर पहुंची तो सिर्फ खाली जमीन मिली। जहां पर न कोई पुराना निर्माण था, न ही नया।

वहीं भूखंडों तक पहुंचने वाले रास्ते पर एक बड़ा दरवाजा है, जिस पर ताला लगाकर चौकीदार बिठा दिया गया है, ताकि आसानी से कोई भूखंडों तक नहीं पहुंच सके।

शिकायतकर्ता भाजपा नेता अवधेश शर्मा ने बताया कि तत्कालीन सरपंच कमलेश चौधरी व उनके पति कैलाश चौधरी ने पंचायत स्टाफ के साथ मिलीभगत कर करोड़ों की जमीन के पट्‌टे फर्जी तरीके से अपने रिश्तेदारों के नाम कर दिए।

यह सब पिछली कांग्रेस सरकार में हुआ। घाेटाले में शामिल कर्मचारियों के नाम पर भी पट्‌टे जारी किए गए। अवधेश ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत जयपुर जिला कलेक्टर को की है।

वो खाली सरकारी जमीन जहां आवास बताकर अवैध पट्‌टे जारी किए गए।

वो खाली सरकारी जमीन जहां आवास बताकर अवैध पट्‌टे जारी किए गए।

अधिकांश पट्‌टे 31 मार्च 2023 को जारी किए

भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि पिछली कांग्रेस सरकार ने जैसे ही दूदू को जिला बनाने का ऐलान किया, वैसे ही पंचायत को नगर परिषद बनाने की भी घोषणा की गई थी।

इस दौरान सरपंच कमलेश चौधरी को ही कार्यवाहक मेयर बनाया गया था। पंचायत से नगर परिषद बनाने के बीच में ही यह पट्टे काटे गए थे, जिसके रिकॉड्‌र्स भी दफ्तर से गायब मिले हैं।

वहीं प्रारंभिक जांच में उपखंड अधिकारी दूदू ने भी स्वीकार किया है कि भूखंड वाले क्षेत्र की जमीन गैर मुमकिन आबादी नगर परिषद के नाम दर्ज है।

अधिकतर पट्टे एक ही दिन 31 मार्च 2023 को जारी किए गए और यह सिलसिला जून माह तक चला। इस दौरान सभी पट्टे पंचायत से बैक डेट में जारी किए गए और जब पंचायत से परिषद में जाने की बारी आई तो 31 अगस्त 2023 से लेकर 1 सितम्बर 2023 के बीच ही पंजीकृत भी करवा लिए गए।

गूगल मैप : 2023 से काटे भूखंड, पहले खाली थी जमीन

भास्कर ने कागजों में मकान बताकर नियम विरुद्ध अवैध पट्टे जारी करने के मामले में गूगल मैप की मदद से इलाके का पुराना सैटेलाइट मैप भी देखा। इस मैप से सामने आया कि साल 2023 से दौरान ही भूखंड काटने का काम किया गया है। इसके पहले से लगातार यह जमीन खाली ही है।

2011 से लेकर 2023 तक की गूगल सैटेलाइट इमेज में सरकारी जमीन खाली दिख रही है, जिसपर अवैध पट्‌टे जारी किए गए हैं।

2011 से लेकर 2023 तक की गूगल सैटेलाइट इमेज में सरकारी जमीन खाली दिख रही है, जिसपर अवैध पट्‌टे जारी किए गए हैं।

मामले में जिम्मेदारों का क्या है कहना…

मामले में आरोपों से घिरी दूदू पंचायत की तत्कालीन सरपंच कमलेश चौधरी से भास्कर ने बात की तो बोलीं- मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। पूरा मामला राजनीति से जुड़ा है।

मुझ पर झूठे आरोप लगाए जा रहे है। नियम कायदों के तहत ही सभी पट्टे जारी किए हैं। जिन्हें पट्‌टे दिए हैं, वो सालों से मौके पर रह रहे हैं। पूरे पंचायत के कोरम ने एक साथ मिलकर पट्टे जारी किए है।

पट्टे जारी करने वाले ग्राम पंचायत दूद के तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी और सचिव रतन शर्मा ने पहले कहा- हो गए होंगे जारी पट्टे, मुझे जानकारी नहीं है।

बाद में भास्कर ने डिटेल में मामला समझाया तो बोले- मामले में जांच होगी तो अपनी बात रखूंगा। हो सकता है किसी ने मेरे फर्जी हस्ताक्षर कर पट्टे जारी करा लिए हो।

भास्कर ने मामले में जयपुर जिला कलेक्टर जितेंद्र सोनी से भी बात की। उन्होंने कहा- दूदू एसडीएम ने दूदू कस्बे के कांकडिया नाडा के पास की जमीन पर नियमों के विपरीत जाकर अवैध पट्टे काटने की शिकायत को लेकर उच्च स्तरीय जांच के लिए उन्हें लिखा था।

अतिरिक्त कलेक्टर मुकेश मुंड की अध्यक्षता में उप निदेशक क्षेत्रीय स्वायत्त शासन विभाग व अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद जयपुर को शामिल कर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।

कमेटी मौका देख चुकी है। अभी दूदू पंचायत से नगर परिषद बनाने के दौरान के सभी रिकॉड्‌र्स को जांचा जा रहा है। जांच में जो तथ्य मिले हैं उसके आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच रिपोर्ट कमेटी ने सब्मिट नहीं की है।



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