जयपुर में हुए कार्यक्रम में डॉक्टरों और इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स को स्ट्रोक के मामलों में तेज और सटीक कार्रवाई की ट्रेनिंग दी गई।
भारत में ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण है लोगों में जागरूकता की कमी। देश में हर 20 सेकंड में एक नया स्ट्रोक का मामला सामने आता है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन (ISA) ने देशभर में ब
अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना कि स्ट्रोक के शुरुआती 4.5 घंटे की गोल्डन विंडो में इलाज करना बेहद जरूरी है। इस समय में सही इलाज मिलने पर मरीज के बचने और ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

आईएसए लोगों को स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानने के लिए BE FAST मेथड अपनाने की सलाह दे रहा है।
जयपुर में जागरूकता फैलाने के लिए आईएसए ने इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस (API, जयपुर चैप्टर) और सोसाइटी फॉर इमरजेंसी मेडिसिन इंडिया (SEMI) के साथ मिलकर पब्लिक एजुकेशन सेशन्स, वर्कशॉप और कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) आयोजित किए। इसमें डॉक्टरों और इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स को स्ट्रोक के मामलों में तेज और सटीक कार्रवाई की ट्रेनिंग दी गई।
आईएसए लोगों को स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानने के लिए BE FAST मेथड अपनाने की सलाह दे रहा है।
- B – Steadiness loss (संतुलन खोना)
- E – Eye imaginative and prescient modifications (दृष्टि में बदलाव)
- F – Face drooping (चेहरे का टेढ़ा होना)
- A – Arm weak point (हाथ-पैर में कमजोरी)
- S – Speech problem (बोलने में कठिनाई)
- T – Time to name emergency companies (तुरंत मदद के लिए कॉल करें)
समय पर इलाज ही सबसे बड़ा हथियार
आईएसए अध्यक्ष डॉ. पी. विजया ने बताया कि स्ट्रोक किसी को भी हो सकता है। इनमें सबसे आम कारण रक्त के थक्के (ब्लड क्लॉट) हैं, जिनका इलाज “IV थ्रोम्बोलाइसिस” इंजेक्शन थेरेपी से किया जाता है। हालांकि भारत में केवल 100 में से 1 मरीज को ही समय पर यह इलाज मिल पाता है। उन्होंने दोहराया कि “टाइम इज ब्रेन” – जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतने अच्छे परिणाम मिलेंगे।
आईएसए सचिव डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि स्ट्रोक अचानक आता है और हर मिनट की देरी स्थायी नुकसान या मौत का कारण बन सकती है। यह केवल जानकारी देने का अभियान नहीं, बल्कि जीवन बचाने का प्रयास है।
आईएसए कोषाध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन श्रीवास्तव ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण है। इसीलिए आईएसए ने चेक बीपी – स्टॉप स्ट्रोक अभियान शुरू किया है। भारत में हर 4 में से 1 वयस्क को हाई बीपी की समस्या है, लेकिन आधे लोग ही इसके बारे में जानते हैं और बहुत कम लोग इसे नियंत्रित रखते हैं।
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