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एसओजी ने शिक्षक भर्ती परीक्षा रीट 2018 और 2022 में फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले 121 शिक्षकों की राइटिंग, हस्ताक्षर एवं फोटो की एफएसएल जांच कराने का निर्णय लिया है। मामले की जांच जोधपुर एसओजी ऑफिस को सौंपी गई है। एफएसएल जांच के लिए अब सभी शिक्षकों क
चयनित शिक्षकों के आवेदन फॉर्म पर किए गए हस्ताक्षर और फोटो को परीक्षा के दौरान किए गए हस्ताक्षर एवं फोटो से, तथा नौकरी लगने के समय दिए गए दस्तावेजों से मिलान कराया जाएगा। इन तीनों प्रकार के दस्तावेजों का मिलान एफएसएल जांच के तहत लिया जाएगा। राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग ने जांच समितियों के माध्यम से पिछले 5 वर्षों में हुई भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा की है।
जालौर जिले के 95 प्रतिशत शिक्षक
- इन शिक्षकों पर डमी कैंडिडेट बैठाने, फर्जी तस्वीरें लगाने और अनुचित तरीकों से पेपर सॉल्व कर परीक्षा पास करने के आरोप हैं। हैरानी की बात यह है कि 121 में से 95 प्रतिशत शिक्षक पेपर लीक माफिया के गढ़ माने जाने वाले जालौर जिले से हैं। एसओजी ने इन 121 शिक्षकों के खिलाफ IPC की धारा 419, 420, 476, 471, 120B और राजस्थान सार्वजनिक भर्ती परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
मामले में आरबीएसई अध्यक्ष बर्खास्त, सचिव निलंबित
- इस मामले में तत्कालीन आरबीएसई अध्यक्ष डीपी जारौली को बर्खास्त किया गया था तथा बोर्ड सचिव को निलंबित किया गया था। इसके बाद इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग उठी थी, लेकिन तत्कालीन गहलोत सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने हेतु कठोर विधेयक लाने की बात कहकर पुलिस से जांच करवाई थी। विपक्षी भाजपा ने सरकार पर सीबीआई जांच का दबाव बनाया, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने सीबीआई जांच कराने से इनकार कर दिया।
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