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खेत पर टैंक में मींगणी से अर्क तैयार करते रावलचंद।
बकरी की मींगणी खाद को किसान अक्सर सीधे खेत में डालते हैं लेकिन फलौदी जिले में लोहावट स्थित नौसर निवासी किसान रावलचंद पंचारिया ने इसमें किफायती नवाचार किया है। रावलचंद इससे अर्क निकालकर काम में लेते हैं, जिससे खाद पर लागत 9 गुणा तक कम हो गई है।
किसान रावलचंद ने बताया, मींगणी को सीधे खेत में डालने पर प्रति बीघा एक ट्रॉली खाद की जरूरत पड़ती है। यह 5000 रुपए की पड़ती है। इससे खरपतवार भी बहुत उगते हैं। इसलिए मैंने 10 गुणा 10 फीट का टैंक बनाया है। इसमें एक ट्रॉली मींगणी और 10 किलो गुड़ डालता हूं।
पानी मिलाकर उसे 10 दिन तक रोजाना हिलाता हूं। उसके बाद तरल खाद को खेत में डालता हूं। इसके लिए फिल्टर सिस्टम भी लगा रखा है। यह तरल खाद 10 बीघा के लिए पर्याप्त होती है और खरपतवार उगने की समस्या भी नहीं रहती। इस विधि को अब दूसरे किसान भी अपना रहे हैं और मुझे मदद के लिए बुलाते हैं। इसी तरह 10 गुणा 10 फीट का टैंक जीवामृत के लिए बनाया हुआ है। उसमें 40 किलो ताजा गोबर, 10 किलो गुड़, 5 किलो बेसन, नाडी की मिट्टी और गोमूत्र डालकर जीवामृत बनाता हूं। नाडी की मिट्टी इसलिए क्योंकि गोचर भूमि में कोई रसायन नहीं होता। उसकी मिट्टी इसमें उपयोगी होती है।
पंचारिया ने बताया- मेरे पास 30 बीघा खेत है और 80 बीघा खेत लीज पर लिया है। मैंने 7 साल के प्रयासों के बाद शकरकंद की मरु गुलाबी, थार मधु और सफेद शकरकंद नामक 3 किस्में इजाद कर पेटेंट करवाया है। थार मधु सालभर उगती है, जिसमें रेशे नहीं होते। सामान्य शकरकंद का उत्पादन प्राय: 25 से 30 क्विंटल प्रति बीघा होता है और यह 20 से 25 रुपए किलो बिकती है जबकि थार मधु प्रति बीघा 40-45 क्विंटल हो जाती है और 30 से 45 रुपए किलो बिकती है।
सामान्य शकरकंद 2-3 दिन में खराब हो जाती है जबकि थार मधु 7 दिन तक ताजा रहती है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि भाव बढ़ने के इंतजार में किसान फसल को नहीं निकालना चाहे तो उसे जमीन में ही छोड़ सकता है। हर सप्ताह सिंचाई कर दें तो यह 6 महीने तक खराब नहीं होती। राजस्थान, एमपी, हरियाणा के 1500 किसान मुझसे इसके बीज ले जा चुके हैं। इसी तरह नींबू की नई किस्म इजाद की है, जिसमें गूदा ज्यादा और रस कम होता है। इसका अचार सालभर ताजा रहता है।
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