भास्कर न्यूज | अजमेर एमडीएस यूनिवर्सिटी की 38वीं इंटर कॉलेज पुरुष-महिला वर्ग तीरंदाजी प्रतियोगिता शनिवार को दयानंद कॉलेज में पूरी हो गई। प्रतियोगिता में केवल इंडियन राउंड होने से ही अच्छे खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता से दूरी बनाए रखी। हालत यह है कि विवि
एक्सपर्ट का कहना है कि इंडियन राउंड का सीधा सा मतलब क्या है कि खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए पात्रता प्राप्त नहीं कर पाएंगे। इस कमी को देखते हुए ही कई अच्छे खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में नहीं पहुंचे। पुरुष वर्ग में किशन चौधरी राजकीय महाविद्यालय अरांई, पवन कुमावत जीसीए अजमेर, दिनेश कुमावत जीसीए अजमेर, नरसीराम गवर्नमेंट कॉलेज पुष्कर और महिला वर्ग में शोभना कुमावत और पूजा महावर स्कोर कर पाई हैं। पूरी प्रतियोगिता में 10 छात्र और दो छात्राओं ने ही भाग लिया है। एक्सपर्ट का कहना है कि कंपाउंड और रिकर्व राउंड नहीं होने का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है कि अच्छे तीरंदाज इंटर कॉलेज प्रतियोगिता में ही आए, दूसरी यूनिवर्सिटी से खेल रहे हैं।
ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में मेडल और खेलो इंडिया हिस्ट्री में मेडल 2019-20 प्राप्त करने वाली कृतिका शर्मा को अजमेर से नहीं खेल कर अन्य यूनिवर्सिटी से खेलना पड़ा। वीसी ने किया शुभारंभ| इससे पूर्व एमडीएस यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने दयानंद महाविद्यालय में 38वीं अंतर महाविद्यालयीन पुरुष एवं महिला तीरंदाजी प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। अग्रवाल ने तीरंदाजी को एकाग्रता, सहनशीलता, अनुशासन और आत्मनियंत्रण का प्रतीक बताया।
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