राजस्थान विधानसभा में राजस्थान विधिविरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक पर चर्चा के दौरान जब शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने अपने संबोधन की शुरुआत श्रीमद्भगवद गीता के श्लोक से की। भाटी ने कहा- “जब-जब धर्म के मिटने का खतरा हुआ है, जब-जब अधर्म ने अ
विदेशी ताक़तों और स्वार्थी दलों पर करारा हमला
भाटी ने कहा कि हमारा देश मज़बूत है, लेकिन इसकी जड़ों को कमजोर करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। कई राजनीतिक स्वार्थी दल और विदेशी ताक़तें भोली-भाली जनता को धर्म और पैसों के लालच में फंसाकर सामूहिक धर्मांतरण करवा रही हैं। उन्होंने इसे सीधे-सीधे देश की एकता और अखंडता पर हमला बताया।
भाटी ने कहा कि “धर्म आस्था का विषय है, सौदेबाज़ी का नहीं। गीता में साफ लिखा है कि पूरी दुनिया का एक ही धर्म है-मानव धर्म। लेकिन आज अलग-अलग मत और पंथ को बड़ा साबित करने की होड़ में समाज में टकराव और कलह को जन्म दिया जा रहा है।”

भाटी ने विधानसभा में कहा कानून बनना चाहिए लेकिन राजनीतिक दुरूपयोग या निर्दोष लोगों को प्रताड़ित नहीं किया जाए।
कानून की आवश्यकता और चेतावनी
भाटी ने जोर देते हुए कहा कि धर्मांतरण विरोधी कानून समय की मांग है और इसे पास करना ही होगा। लेकिन उन्होंने यह भी आगाह किया कि इस कानून का उपयोग राजनीतिक दुश्मनी या निर्दोष लोगों की प्रताड़ना के लिए नहीं होना चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि सख्ती और न्याय, दोनों का संतुलन बना रहे। उन्होंने दो टूक कहा – “जो लोग संगठित तरीके से धर्मांतरण कर रहे हैं, उन्हें किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। सरकार को कठोरता से ऐसे नेटवर्क का सफाया करना होगा।”
आदिवासी समाज के मुद्दे पर फोकस
भाटी ने आदिवासी समाज की पीड़ा को सामने रखते हुए कहा कि यह समाज सांस्कृतिक रूप से भारत का सबसे समृद्ध समाज है। लेकिन इन्हीं भोले और सच्चे लोगों को बहला-फुसलाकर उनका धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने चेताया कि अगर अब भी रोक नहीं लगी तो यह परंपरागत और सांस्कृतिक धरोहर नष्ट हो जाएगी।
सीमांत इलाकों का उदाहरण और सौहार्द की परंपरा
भाटी ने अपने सीमांत क्षेत्र का हवाला देते हुए कहा कि वहाँ सैकड़ों वर्षों से भाईचारा, आपसी समझ और सौहार्द कायम है। उन्होंने गर्व से कहा कि “विभाजन के समय जब पंजाब और बंगाल दंगों और लाशों से पट गए थे, तब भी राजस्थान में धर्म और जाति के नाम पर कभी दंगा नहीं हुआ। आज़ादी के 70 साल बाद भी यह परंपरा बनी हुई है।” उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र इतना संवेदनशील है, लेकिन यहां की जनता ने हमेशा संयम और समझदारी दिखाई है।
राजनीति में जहर बोने पर हमला
भाटी ने तीखे अंदाज़ में कहा कि आज वोट के लालच में राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि कभी हिंदू-मुस्लिम, कभी जाट-राजपूत और कभी अन्य समाजों के बीच नफरत की दीवार खड़ी की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग गांधी और नेहरू का नाम तो लेते हैं लेकिन उन्हीं के नाम पर समाज को तोड़ने और आग लगाने का काम करते हैं।
महान नेताओं की परंपरा का स्मरण
भाटी ने गर्व से कहा कि वह उस क्षेत्र से आते हैं जहां स्व. जसवंत सिंह जी, तनसिंह जी, गंगाराम जी, विरधिचंद जैन जी और हादी साहब जैसे नेता हुए जिन्होंने राजनीति की लेकिन कभी धर्म और जाति के आधार पर जनता को नहीं बांटा। इस दौरान स्व. पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों को भी दोहराया।
सांस्कृतिक विरासत और एकता का संदेश
भाटी ने अंत में अपने क्षेत्र की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का स्मरण करते हुए कहा कि पीर-फ़क़ीरों और बाबा रामदेव जी महाराज जैसी परंपराएं हमारी ताक़त हैं। यही हमारी संस्कृति है, जिसने हमेशा सबको साथ लेकर चलना और समाज को जोड़ना सिखाया है।
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