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जयनारायण विश्विद्यालय में शिक्षक विद्यार्थी संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बोलते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री मनोज कुमार ने कहा कि भारत में पर्याप्त भौगोलिक एवं जलवायु विविधता है, तथापि भारतीय साहित्य में केवल भौगो
परिषद की जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर इकाई द्वारा भाषा प्रकोष्ठ नए परिसर के राजनीति विज्ञान विभाग सभागार में आयोजित शिक्षक शोधार्थी संवाद में उन्होंने शिक्षक और शोधार्थियों का आव्हान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा को पर्याप्त शोध कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे लाने का प्रयास करें।
आदि ग्रंथों पर करें शोध
विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष डॉ गोविंद सिंह ने बताया कि शिक्षक और शोधार्थियों के बीच यह संवाद अत्यंत सकारात्मक, प्रेरणास्पद और ज्ञान चक्षु खोलने वाला सिद्ध हुआ जिसमें राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री मनोज कुमार और क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ विपिन चंद्र पाठक का सानिध्य प्राप्त हुआ। शिक्षकों और शोधार्थियों ने अपनी जिज्ञासाएं रखी जिन पर चर्चा करते हुए बताया गया कि शोधार्थियों को आदिग्रंथ रामायण, महाभारत, पुराण में मौजूद भौगोलिक ज्ञान , राजनीतिक ज्ञान सामाजिक ज्ञान और साहित्यिक ज्ञान अपने-अपने विषय के अनुरूप शोध के लिए चुनना चाहिए जो कि भारतीय परंपरा में वर्तमान शिक्षा पद्धति के लिए एक अभिनव प्रयास होगा।
भूगोल के शोधार्थियों के एक सवाल का जवाब देते हुए हुए मनोज कुमार ने कहा कि भारत के प्रसिद्ध पांच सरोवर कैलाश मानसरोवर, पुष्कर, नारायण सरोवर ,बिंदु सरोवर और पंपा सरोवर है। प्रत्येक व्यक्ति का जन्म एक नियत नक्षत्र में होता है, जिसकी काल गणना अत्यंत सटीक है। कालांतर में इस नक्षत्र शब्द के लिए अंग्रेजी में माइलस्टोन बना होगा।
राजनीति विज्ञान के एक छात्र के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि हम दक्षेस आसियान ओपेक आदि पढ़ते हैं परंतु ‘रामायण देशो का संगठन ‘ भी है जिसमें ऐसे 16 देश शामिल है जहां रामायण पढी गायी या मंचित की जाती है।
क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ विपिन चंद्र पाठक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय भाषाओं में अनुवाद को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में राजनीति विज्ञान विभाग से डॉ. विजयश्री और डॉ दिनेश गहलोत, हिंदी विभाग से डॉ कामिनी ओझा, गणित विभाग से डॉ रामदयाल पंकज, भूगोल विभाग से डॉ ललित सिंह झाला, डॉ गौरव कुमार जैन और डॉ ओमप्रकाश, थिएटर सेल से डॉ हितेंद्र गोयल, इतिहास विभाग से डॉ भवानी सिंह राजपुरोहित,बीएड प्रकोष्ठ से डॉ अंजना चौधरी सहित विभिन्न विभागों के शिक्षकों और शोधार्थियो ने संवाद में सक्रिय भागीदारी निभाई। अंत में डॉ विजय श्री ने धन्यवाद ज्ञापित किया
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