☜ Click Here to Star Rating



राजस्थान विश्वविद्यालय का 20 साल पहले स्थापित डिजिटल की रीढ़ माना जाने वाला इंफोनेट सेंटर तकनीकी सिस्टम जर्जर स्थिति में है। कोरोना महामारी के बाद प्रवेश से लेकर माइग्रेशन तक का काम ऑनलाइन होने के चलते छात्रों और विश्वविद्यालय दोनों के लिए सिरदर्द बन

.

स्पीड कम और अपडेट नहीं होने से विश्वविद्यालय में प्रवेश एवं परीक्षा के लिए आवेदन, फीस जमा करवाना, प्रवेश पत्र डाउनलोड व परिणाम देखने मुश्किल जैसे अनेक साइड इफैक्ट देखने को मिल रहे हैं।

मौजूदा स्थिति में इंटरनेट की स्पीड एक जीबी (गीगा बाइट) है, जो परीक्षार्थियों की संख्या और काम के हिसाब से बेहद कम है। जिसका सीधा असर हर साल करीब 5 लाख छात्रों पर पड़ रहा है। इंफोनेट सेंटर का यदि समय पर तकनीकी अपग्रेड नहीं करता, तो आगामी दिनों में छात्रों को ऑनलाइन सुविधा में खलल पड़ सकता है।

इंटरनेट की स्पीड बढ़ानी चाहिए: विशेषज्ञ

विशेषज्ञ के अनुसार विश्वविद्यालय के हिसाब से 1 जीबी की स्पीड बेहद कम है। बड़ी संख्या में यूजर्स के साथ सर्वर ओवरलोड हो जाता है। इंफोनेट सेंटर की इंटरनेट स्पीड को कम से कम 10 जीबीपीएस या उससे अधिक किया जाना चाहिए। इसके अलावा सेन्टर को नियमित तकनीकी स्टाफ उपलब्ध करवाने चाहिए। छात्र-छात्राओं को अलग-अलग टाइम स्लॉट में सेवा देने की योजना बनाने के साथ ही मोबाइल एप और एसएमएस अलर्ट जैसी सेवाएं जोड़ी जा सकती हैं। वेबसाइट को क्लाउड सर्वर पर शिफ्ट करना।

सेंटर की ये है जिम्मेदारी

  • कैंपस में वाई-फाई, राजस्थान-कॉमर्स कॉलेज में वाइड एरिया नेटवर्क उपलब्ध कराना।
  • वेबसाइट का डिजाइन, डलवपमेंट एवं मेन्टेन रखना।
  • यूजर्स व सर्वर मेन्टेन का काम।
  • संस्थानों को संबद्धता देने के लिए ऑनलाइन सुविधा देना।
  • सर्कुलर-नोटिस निकालना, घोषणाएं, एचीवमेंट,न्यूज लेटर्स।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading