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बुखार से तड़पती महिला को गांव वाले ट्यूब पकड़ा कर नदी पार करा रहे हैं। ये दृश्य किसी फिल्म का नहीं…बल्कि 21वीं सदी के राजस्थान की हकीकत है। चित्तौड़गढ़ जिले की भैंसरोडगढ़ पंचायत समिति के सुठाला गांव की ये तस्वीरें केवल दर्द ही नहीं, बल्कि प्रशासन और व्

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गांव के 800 लोग पिछले 2 महीने से भगवान भरोसे जी रहे हैं। न सड़क है, न पुलिया…। सोचिए…अगर इस गांव में कोई बीमार हो जाए, तो उसे हॉस्पिटल तक ले जाने का कोई रास्ता ही नहीं है। गांव के लोग अपनी जिंदगी और मौत के बीच हर रोज जद्दोजहद कर रहे हैं।

सबसे पहले देखिए 3 तस्वीरें…

सबसे पहले गांव के लोग ट्यूब पर महिला के कपड़े और अन्य सामान रखकर नदी के बहाव में लाए।

सबसे पहले गांव के लोग ट्यूब पर महिला के कपड़े और अन्य सामान रखकर नदी के बहाव में लाए।

इन लोगों ने बुखार से पीड़ित महिला को ट्यूब पकड़ाई और फिर उसके साथ नदी में उतर गए।

इन लोगों ने बुखार से पीड़ित महिला को ट्यूब पकड़ाई और फिर उसके साथ नदी में उतर गए।

पानी के तेज बहाव के बीच महिला को नदी पार करवाई और हॉस्पिटल पहुंचाया।

पानी के तेज बहाव के बीच महिला को नदी पार करवाई और हॉस्पिटल पहुंचाया।

गांव के दोनों तरफ पुलिया टूटी साल 1970 में राणा प्रताप सागर बांध के निर्माण के दौरान लुहारिया पंचायत का सुठाला गांव विस्थापित किया गया था। लेकिन यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। करीब 800 की आबादी वाला यह गांव बरसात में टापू की तरह अलग-थलग पड़ जाता है।

गांव के एक तरफ ब्राह्मणी नदी है तो दूसरी तरफ एक बड़ा नाला। साल 2024 की बरसात में ब्राह्मणी नदी पर बनी सुठाला पुलिया टूट गई थी। जबकि गांव के दूसरी तरफ बड़े नाले पर बनी पाड़ाझर पुलिया भी टूटी हुई है, ऐसे में बारिश के दौरान मुख्यालय से गांव का संपर्क कट जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, इस साल पहली बारिश के साथ ही हालात बिगड़ गए। मजबूरी में ग्रामीणों ने 4 जुलाई को लकड़ी का अस्थाई पुल बनाया, लेकिन 2 दिन बाद ही तेज बहाव में वह भी बह गया। तब से गांव पूरी तरह टापू बन गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि बीमार और गर्भवती महिलाओं तक को ट्यूब के सहारे नदी पार कर अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।

ब्राह्मणी नदी पर सुठाला पुलिया पर 28 अगस्त को अस्थायी पुल बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन ग्रामीण सफल नहीं हो पाए।

ब्राह्मणी नदी पर सुठाला पुलिया पर 28 अगस्त को अस्थायी पुल बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन ग्रामीण सफल नहीं हो पाए।

ग्रामीण सूरजमल भील ने कहा-

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दो दिन पहले (28 अगस्त) ही एक महिला को गंभीर हालत में ट्यूब पर बैठाकर नदी पार कर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। हर बरसात में पुलिया टूट जाती है और प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति कर हाथ खड़े कर देता है।

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ग्रामीण तुलसीराम ने कहा-

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परमाणु बिजलीघर आपदा से बचाव को लेकर प्रशासन मॉक ड्रिल करवाता है, लेकिन यहां वास्तविक आपदा जैसी स्थिति बनी हुई है, जिस पर सब आंखें मूंदे बैठे हैं।

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नदी की गहराई 12 फीट से ज्यादा ग्रामीण मुकेश चौधरी ने बताया- ब्राह्मणी नदी पर सुठाला पुलिया की लंबाई लगभग 100 फीट है, जिसमें बीच का करीब 30 से 40 फीट हिस्सा टूटा हुआ है। टूटे हिस्से पर पानी की गहराई 12 फीट से अधिक है। 28 अगस्त को ग्रामीणों ने पत्थर-पाइप डालकर अस्थायी पुल बनाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके।

35 किलोमीटर दूर हॉस्पिटल मुकेश चौधरी ने बताया- गांव में प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था तक नहीं है। इलाज के लिए करीब 35 किलोमीटर दूर रावतभाटा जाना पड़ता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी घरों में ही करवाई जाती है। गंभीर बीमारों को मजबूरी में ट्यूब पर बैठाकर नदी पार कर अस्पताल ले जाया जा रहा है। क्या कोई बड़ी दुर्घटना होने पर ही प्रशासन जागेगा?

अब जिम्मेदारों के जवाब भी पढ़ लीजिए…



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