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राखी के त्योहार पर इस बार सौभाग्य योग और अमृत सिद्धि योग का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में राहुकाल को छोड़कर बहनें पूरे दिन भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।

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ज्योतिषाचार्य पंडित बद्रीलाल दाधीच ने बताया- रक्षाबंधन के दिन भद्रा की बाधा नहीं है। राखी बांधने के लिए चार विशेष शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं – प्रातःकालीन श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 7:44 से 9:20 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दिन में दोपहर 12:18 से 1:10 बजे तक, चर लाभ व अमृत काल दोपहर 12:45 से शाम 5:30 बजे तक और सायंकालीन लाभ मुहूर्त शाम 7:16 से रात 8:35 बजे तक रहेगा। इन सभी मुहूर्त में राखी बांधना अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

इन बातों का रखें ध्यान

पंडित बद्रीलाल दाधीच ने बताया- राखी बांधते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। राखी बंधवाते वक्त भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए क्योंकि ये दिशाएं धन और आयु की वृद्धि करती हैं। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके राखी नहीं बांधनी चाहिए। राखी के साथ श्रीफल यानी नारियल की भेंट अवश्य करनी चाहिए जो सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

ये है पौराणिक मान्यता

पंडित बद्रीलाल दाधीच ने बताया- रक्षाबंधन की यह पवित्र परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी और बाद में उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उनके द्वारपाल बन गए। चिंतित माता लक्ष्मी ने नारद मुनि की सलाह पर राजा बलि को राखी बांधकर अपना भाई स्वीकार किया और दान स्वरूप भगवान विष्णु को वापस मांग लिया। इसी घटना से रक्षाबंधन की पावन परंपरा का आरंभ हुआ।

रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं बल्कि भाई-बहन के निस्वार्थ प्रेम और पारस्परिक सुरक्षा का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि और कल्याण की मंगल कामना करती हैं। यह त्योहार हमारी संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को जीवित रखने का माध्यम है।



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