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दौसा में नेशनल हाईवे पर श्रद्धालुओं से भरी पिकअप खड़े कंटेनर में घुस गई। एक्सीडेंट में 11 लोगों की मौत हो गई। इनमें एक से 11 साल के सात बच्चे और 4 महिलाएं थीं।

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हादसे के बाद प्रत्यक्षदर्शी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पिकअप में ड्राइवर समेत 25 लोग बैठे थे। ज्यादा सवारियां बैठाने के चक्कर में पिकअप में पीछे की तरफ लकड़ी के दो फट्टे लगाए गए थे।

12 लोग नीचे बैठे थे और लगभग इतने ही फट्टों के ऊपर बैठे थे। मरने वाले 4 परिवारों के थे। अब उनके परिवार में सिर्फ पुरुष ही बच्चे हैं। इनकी पत्नी और बच्चों की मौत हो चुकी है।

हादसे के बाद मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाले प्रत्यक्षदर्शी ने बताया- बम फटने जैसा धमाका सुनाई दिया। बच्चों और महिलाओं की चीखें रोंगटे खड़े कर देने वाली थी। घायल एक-दूसरे के ऊपर पड़े थे।

हर तरफ खून फैला हुआ था। कभी किसी बच्चे के रोने की आवाज आती तो कभी किसी महिला के चीखने की। अपने पत्नी-बच्चों की मौत पर पुरुष भी रो पड़े। सभी बदहवास हो गए।

पढ़िए हादसे की ग्राउंड रिपोर्ट…

तस्वीर उस पिकअप की है, जिसमें ड्राइवर समेत 25 लोग बैठे थे। इनमें से 11 की मौत हो गई।

तस्वीर उस पिकअप की है, जिसमें ड्राइवर समेत 25 लोग बैठे थे। इनमें से 11 की मौत हो गई।

खाटूश्याम से लौट रहे थे घर एक्सीडेंट बुधवार सुबह करीब 3:30 बजे नेशनल हाईवे-148 (जयपुर से आगरा) पर दौसा में सैंथल थाना इलाके के बापी गांव में हुआ। खाटूश्याम से एटा (उत्तर प्रदेश) जा रही श्रद्धालुओं से भरी पिकअप हाईवे पर खड़े कंटेनर में घुस गई।

असरौली (एटा) गांव से करीब 45 श्रद्धालु दो पिकअप में खाटूश्याम मंदिर गए थे। वापसी में महिलाओं-बच्चों से भरी एक पिकअप का एक्सीडेंट हो गया। इसमें 10 ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जबकि एक को जयपुर रेफर किया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हादसे में 14 लोग घायल हैं, जिनका दौसा और जयपुर के हॉस्पिटल में इलाज जारी है। सभी उत्तर प्रदेश के एटा और फिरोजाबाद के रहने वाले हैं।

पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि हादसा ओवर स्पीड और ड्राइवर को झपकी आने से हुआ।

सुबह नींद में सोई महिला एक्सीडेंट के बाद उठी। बच गई तो लोगों से पूछने लगी- क्या हुआ है, मैं कहां हूं?

सुबह नींद में सोई महिला एक्सीडेंट के बाद उठी। बच गई तो लोगों से पूछने लगी- क्या हुआ है, मैं कहां हूं?

बच्चों-महिलाओं की चीखें रोंगटे खड़े कर देने वाली थी: प्रत्यक्षदर्शी हादसे के बाद सबसे पहले दौड़ कर पहुंचे थे ढाबे पर काम करने वाले गणेश कुमार। उन्होंने ही घायल लोगों को पिकअप से बाहर निकाला था।

गणेश कुमार ने बताया- सुबह होने वाली थी। हाईवे पर ट्रकों की आवाजाही थी। अचानक बम फटने जैसा धमाका सुनाई दिया। एक पिकअप हाईवे के किनारे कंटेनर में घुस गई थी।

मैं धमाके की तरफ दौड़ा तो बच्चों और महिलाओं की चीखें सुनाई पड़ी। रोंगटे खड़े हो गए। जब पास जाकर देखा तो ढेरों लोग इधर-उधर पड़े थे। कुछ जमीन पर, कुछ पिकअप में थे।

केबिन में बैठे ड्राइवर समेत 4 लोग मामूली चोटिल थे। पीछे पिकअप का दृश्य दिल दहला देने वाला था।

तस्वीर हादसे के चंद सेकेंड बाद की है। घायल एक-दूसरे के ऊपर पड़े थे।

तस्वीर हादसे के चंद सेकेंड बाद की है। घायल एक-दूसरे के ऊपर पड़े थे।

पत्नी-बच्चों को देख बेसुध हुए पुरुष गणेश कुमार ने बताया- पिकअप में सिर्फ महिलाएं और बच्चे थे। खून बिखरा था और रोने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई दे रही थी। इतने में पीछे से एक और पिकअप आई। इसमें पुरुष सवार थे। एक्सीडेंट देख बेसुध हो गए और अपने बच्चों और पत्नियों को संभालने लगे।

जैसे-जैसे उन्हें अपने परिजन मिलते गए, वैसे-वैसे पुरुष उनकी हालत देख रोने लग गए। कोई बच्चों को संभालता तो कोई अपनी पत्नी को संभालता। यहां का मंजर कोई देख लेता तो उसकी रुलाई फूट पड़ती। हमने भी जैसे-तैसे उन्हें संभाला। पुलिस को फोन किया और एम्बुलेंस को बुलाया।

दूसरी पिकअप में सवार महिलाएं अपने परिजनों की मौत के बाद अस्पताल में बिलखती रही।

दूसरी पिकअप में सवार महिलाएं अपने परिजनों की मौत के बाद अस्पताल में बिलखती रही।

फट्टे लगाकर बैठाई थी सवारी गणेश ने बताया- पिकअप ड्राइवर ने ज्यादा सवारी बैठाने के लिए पीछे बॉडी में ऊपर फट्टे लगा कर जगह बनाई थी। कुछ सवारी नीचे थी और कुछ सवारी ऊपर बैठकर आ रही थी। ऐसे में पीछे बैठे लोगों की ही मौतें हुई और वहीं ज्यादा घायल भी हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, 6 फीट ऊंची पिकअप में 3 फीट की ऊंचाई पर 2 फट्टे लगाए गए थे। इसमें ऊपर-नीचे लोग बैठे थे।

अस्पताल में जब लगातार मौतों का आंकड़ा बढ़ा तो परिजन सुबकने लगे। घायलों के जिंदा के स्वास्थ्य की चिंता करने लगे।

अस्पताल में जब लगातार मौतों का आंकड़ा बढ़ा तो परिजन सुबकने लगे। घायलों के जिंदा के स्वास्थ्य की चिंता करने लगे।

4 परिवारों में सिर्फ पुरुष ही बचे सैंथल थाना इंचार्ज सुरेंद्र सिंह ने बताया- हादसे में संजीव लोधी की पत्नी प्रियंका (25) और बेटी पूर्वी (3) की मौत हो गई। रवि लोधी की पत्नी सोनम (27), बेटी सलोनी (9) व मिष्टी (1) की जान चली गई। जयप्रकाश लोधी की पत्नी शीला (28) व बेटे निर्मल (11) और मनोज की पत्नी सीमा (29) व बेटे बाबू (3) की मौत हो गई।

इन चार परिवारों में अब संजीव, रवि, जयप्रकाश और मनोज ही बचे हैं। चारों एटा जिले के शीतलपुर गांव के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी और बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा वैष्णवी (7) पुत्री सौरभ और महक (7) पुत्री श्याम सुंदर की मौत हो गई। इनके परिजन या तो घायल हैं या पीछे आ रही पिकअप में सवार थे।

तस्वीर, सैंथल थाने में खड़ी पिकअप की है। इसके पीछे का हिस्सा पूरी तरह डैमेज हो गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना भीषण था।

तस्वीर, सैंथल थाने में खड़ी पिकअप की है। इसके पीछे का हिस्सा पूरी तरह डैमेज हो गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना भीषण था।

11 अगस्त को निकले थे जिला अस्पताल पहुंचे एटा जिले के शीतलपुर ब्लॉक प्रधान पुष्पेंद्र सिंह लोधी ने बताया- 11 अगस्त को दो पिकअप से करीब 45 लोग खाटूश्यामजी के दर्शन करने के लिए निकले थे।

वहां 12 अगस्त को सभी ने दर्शन और भंडारे का आयोजन किया था। 12 अगस्त को देर रात लौटते वक्त पिकअप की कंटेनर से टक्कर हो गई। सभी मृतक और घायल मजदूर वर्ग के हैं।

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