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जानपालिया में तैयार भेड़ फार्म हाउस और आधुनिक खेती की जा रही है।
भारत-पाक बॉर्डर के जानपालिया गांव में किसान आधुनिक तरीके से खेती में नवाचार कर लाखों रुपए कमा रहे है। इतना ही नहीं खेती भी पेस्टीसाइड से दूर जैविक तरीके से की जा रही है। इसके लिए किसान हरिराम भाखर खुद ही जैविक खाद भी तैयार कर रहे है। खेती के साथ-साथ
सेड़वा तहसील के जानपालिया गांव निवासी हरिराम भाखर पिछले कई सालों से खेती में नवाचार के नए-नए प्रयोग कर रहे है। भारत-पाक बॉर्डर से महज 2 किमी. दूरी पर यह जानपालिया गांव है। हरिराम ने कोटा में पीएमटी की तैयारी के दौरान असफल होने के बाद अपना कॅरियर उसके पिता बालाराम भाखर के साथ खेती और पशुपालन में हाथ बढ़ाने से शुरू किया। पहले पारंपरिक खेती जीरा, ईसबगोल, बाजरा, अरंडी की खेती करते थे।
अब मार्गदर्शक उनके बड़े भाई डॉ. रावताराम भाखर द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र गुड़ामालानी में एसआरएफ में अपनी सेवाएं दी। हरिराम ने कृषि विज्ञान केंद्र गुड़ामालानी से विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण प्राप्त कर और विभिन्न प्रकार के केंद्रीय संस्थानों, काजरी जोधपुर, अटारी जोधपुर केंद्रीय भेड़ एवं अनुसंधान केंद्र अविकानगर टोंक का भ्रमण कर नवाचारों को देखा। इसके बाद आर्या परियोजना के तहत भेड़-बकरी पालन का प्रशिक्षण लिया।
नवाचार; नेपियर घास, गोबर गैस प्लांट, एनएरोबिक कंपोस्ट मॉडल लगाए, किसानों को कर रहे प्रेरित
खेती में नवाचार के रूप में नेपियर घास की खेती की। वहीं गोबर गैस प्लांट, एनऐरोबिक कंपोस्ट मॉडल, प्राकृतिक खेती में जीवामृत, बीजमृत, निमास्त्र का प्रयोग केवीके के मार्गदर्शन में किया गया है। धार शोभा खेजडी, अजोला, अनार की खेती, खजूर की खेती, चीकू, सहजन के पौधे भी लगाए है। फार्म पर विभिन्न प्रकार की इकाइयां स्थापित की गई।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत भेड़ फॉर्म 500 भेड़ का को एनएलएम योजना के तहत स्थापित किया। फार्म हाउस पर 3000 अनार के पौधे, 200 खजूर के पौधे और एक हेक्टेयर में नेपियर घास की खेती की गई है। पूरी खेती सिंचाई ड्रिप इरिगेशन से की जा रही है। अब हरिराम भाखर के नवाचारों को देखने के लिए जिलेभर के कृषि विज्ञान के स्टूडेंट और किसान भी देखने आ रहे है।
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