वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय सीकर जिले के रेवासा धाम में कथा सुना रहे हैं। इस दौरान इंद्रेश उपाध्याय जन्माष्टमी के अवसर पर शनिवार को जयपुर के आराध्य श्री गोविंद देवजी मंदिर पहुंचे थे। जन्माष्टमी अभिषेक दर्शन के दौरान उनके साथ श्री मलू
रेवासा में कथा के दौरान उन्होंने बताया- जयपुर के गोविंद देवजी, गोपीनाथ जी और करौली के मदन मोहन जी एक ही हैं। कथा के दौरान वे गोविंददेवजी के प्राकट्य के बारे में बता रहे थे। उन्होंने कहा- जब गोविंद देवजी का स्वरूप प्रकट हुआ, तब माताओं ने घूंघट कर लिया। इस पर वज्रनाभ (श्रीकृष्ण के प्रपौत्र) ने अपनी दादी से पूछा – आपने घूंघट क्यों किया। तब उनकी दादी ने कहा- इनका मुख श्रीकृष्ण जैसा ही है। इनका मुखमंडल, नाक, होंठ सब ठाकुर जी जैसे हैं।
इंद्रेश उपाध्याय बोले- ऐसे श्री गोविंद देवजी जयपुर में विराजमान हैं। गोपीनाथ जी जयपुर में ही विराजते हैं। पहले मदन मोहन जी भी जयपुर में ही विराजते थे, बाद में करौली विराज गए। गौड़ीय वैष्णव परंपरा के अन्य देवालय जैसे श्री दामोदर जी और श्री विनोदी लाल जी भी जयपुर में ही विराजमान हैं।
इस नाते से श्री राधा विनोदी लाल, श्री राधा दामोदर लाल, श्री राधा गोपीनाथ, श्री राधा मदन मोहन लाल और श्री राधा गोविंद देव इतने ठाकुर जयपुर में विराजमान हैं। यह सभी हमारे ब्रज के ही हैं। जयपुर को छोटी काशी कहते है, लेकिन वास्तविकता में जयपुर तो बड़ा वृंदावन है। यह कोई छोटा-मोटा नहीं है। बल्कि बड़ा वृंदावन है। जन्माष्टमी के दिन ऐसे श्री गोविंद देव जी का दर्शन करने का मुझे सौभाग्य मिला।

गोविंद देव जी को देखकर संतोष मिलता है
इंद्रेश उपाध्याय ने आगे कहा- हम जब जगन्नाथ पुरी जाते हैं या द्वारका पुरी जाते हैं तो मन में यह भाव आता है कि लाला, इतने दूर से लोग तुम्हारे दर्शन करने आए हैं। इन्हें कोई कठिनाई तो नहीं होती होगी। लेकिन गोविंद देवजी को देखकर संतोष मिलता है कि यहां जयपुर के लोग अपने ठाकुर जी से इतना प्रेम करते हैं।
धार्मिक मान्यता – तीनों मंदिरों के दर्शन से मिलता है मोक्ष
बता दें कि एक धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण के प्रपौत्र ने अपनी दादी से भगवान के स्वरूप के बारे में जानना चाहा था। तब जिस काले पत्थर पर भगवान कृष्ण स्नान करते थे, उसी पत्थर से तीन मूर्तियों का निर्माण हुआ। पहली मूर्ति में भगवान के मुखारविंद की छवि आई, जो जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में विराजमान है। दूसरी मूर्ति में वक्षस्थल की छवि आई, जो जयपुर में ही गोपीनाथ जी मंदिर में विराजमान है। तीसरी मूर्ति में चरणारविंद की छवि आई, जो करौली के मदन मोहन जी मंदिर में विराजमान है।
ऐसी मान्यता है कि इन तीनों विग्रहों का एक ही सूर्य में दर्शन करने से भगवान श्रीकृष्ण के संपूर्ण स्वरूप के दर्शन होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के चलते जन्माष्टमी पर लाखों श्रद्धालु जयपुर और करौली पहुंचते हैं और एक ही दिन में तीनों स्वरूपों के दर्शन का पुण्य लाभ उठाते हैं।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments