5 साल बाद खुले घोसुंडा बांध के गेट।
चित्तौड़गढ़ जिले के प्रमुख बांध ‘घोसुंडा’ लबालब हो चुका है। 5 साल बाद बांध के गेट खोले गए। दस सालों में सिर्फ चार बार ही गेट खोले गए है। उदयपुर में हुई अच्छी बारिश की वजह से बेड़च नदी में पानी की आवक लगातार बनी रही, जिसके चलते घोसुंडा बांध ओवरफ्लो हो
सोमवार की सुबह चित्तौड़गढ़ के जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने विधिपूर्वक पूजा कर बांध के गेट खोले। इस दौरान 30-30 सेंटीमीटर के दो गेट खोले गए, जो शाम 7 बजे तक भी खुले रहे।
शहर के डेढ़ लाख घरों को होती है पानी की सप्लाई घोसुंडा बांध के पानी से रोजाना शहर में लगभग 1.5 लाख घरों को पानी की सप्लाई की जाती है। इसके अलावा हिंदुस्तान जिंक कंपनी को भी पानी की आपूर्ति की जाती है। बांध की देखरेख भी हिंदुस्तान जिंक द्वारा की जाती है। इस तरह यह बांध आम जनता और उद्योगों, दोनों के लिए जीवन रेखा के रूप में काम करता है। यह बांध पिछले 10 सालों में 2016, 2017, 2019 में खोला गया था, अब 5 साल बाद 2025 में खोला गया है।

इस दौरान दो गेट 30-30 सेंटीमीटर खोले गए, जो शाम 7 बजे तक भी खुले रहे।
चित्तौड़गढ़ से उदयपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित घोसुंडा बांध की भराव क्षमता 31.81 एमसीएफटी (मिलियन क्यूबिक मीटर) है। इसमें से 200 एमसीएफटी पानी सालभर में सप्लाई किया जाता है, जबकि 800 एमसीएफटी पानी उद्योगों को दिया जाता है। शहर के लिए प्रतिदिन 0.5 एमसीएफटी पानी बांध से सप्लाई किया जाता है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी मिलता है।
सिंचाई और सूखे से निपटने के लिए हुआ था निर्माण इस बांध का मुख्य रूप से सिंचाई और सूखे के समय लोगों की मदद के लिए बनवाया गया था। यह बांध न केवल तकनीकी दृष्टि से उपयोगी है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है।
इस बांध में पानी की आवक की बात करें तो उदयसागर से निकलने वाली बेड़च नदी इसका मुख्य स्रोत है। सबसे पहले पानी उदयसागर डेम में पहुंचता है, फिर वह वल्लभनगर डेम और उसके बाद बड़गांव डेम में जाता है। अंत में यह पानी घोसुंडा डेम तक पहुंचता है, जिससे यह भरता है।

घोसुंडा बांध चारों ओर से हरियाली और चट्टानी पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ घोसुंडा बांध न केवल पानी का स्रोत है, बल्कि यह एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल भी है। यह बांध चारों ओर से हरियाली और चट्टानी पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो इसकी सुंदरता को और भी बढ़ा देते हैं। अरावली पर्वतमाला की ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियां, और विविध वनस्पति तथा जीव-जंतुओं की उपस्थिति इस स्थान को और भी आकर्षक बनाती है। यहां का शांत और साफ पानी, हरियाली से घिरी चट्टानें और आसमान का प्रतिबिंब इस बांध को प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए एक आदर्श स्थान बना देता है।
ड्रोन वीडियो – मुरली कुमावत
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