शहर के मुख्य गणेश मंदिर रातानाडा में प्रथमेश्वर गणेश जी की स्वयंभू मूर्ति है। यह मंदिर मारवाड़ में होने वाले तमाम मंगल कार्यों की शुरुआत का केंद्र माना जाता है।
जोधपुर में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। ब्ल्यू सिटी के प्रमुख गणेश मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। तीन साल बाद बुधवार को गणेश चतुर्थी आने से सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और शुभ योग का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इस बा

रातानाडा गणेश मंदिर में दर्शन के लिए महिला-पुरुषों की अलग-अलग कतारें लगी हैं। फोटो जर्नलिस्ट विजय ओझा बताते हैं कि अलसुबह से ही मैन सर्किट हाउस रोड से लेकर मुख्य मंदिर तक श्रद्धालू कतार में लगे हुए हैं।
शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में सुबह से ही दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और इनमें सबसे अहम है रातानाडा गणेश मंदिर, जो जोधपुर का सबसे बड़ा गणेश मंदिर है, में भी भक्तों की उमड़ती भीड़ के चलते यहां सुबह से ही आधा किमी लंबी कतारें देखी जा रही है। पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर भूतल से लगभग 108 फीट की ऊंचाई पर बना है और यहां सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना हो रही है।
शुभ मुहूर्त पर प्रतिमाएं विराजित
आज के दिन, चित्रा नक्षत्र, बुधवार और भाद्रपद महीने की चतुर्थी तिथि से शुभ संयोग बन रहा है। गणेश पुराण में बताया गया है कि ऐसे ही संयोग में देवी पार्वती ने दोपहर के समय गणपति की मूर्ति बनाई थी, जिसमें भगवान शिव ने प्राण डाले थे। इस खास दिन पर गणपति की स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं। इनमें पहला सुबह 11:10 से दोपहर 12:30 तक और दूसरा दोपहर 3:45 से शाम 6:45 तक विघ्नहर्ता की प्रतिमाएं विराजित की जाएगी।

रातानाडा गणेश मार्ग पर दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालु।
प्रमुख मंदिरों में दर्शन करने पहुंच रहे श्रद्धालू
शहर के मुख्य गणेश मंदिर रातानाडा में प्रथमेश्वर गणेश जी की स्वयंभू मूर्ति की स्थापित है। यह मंदिर मारवाड़ में होने वाले समस्त मंगल कार्यों की शुरुआत का केंद्र माना जाता है। हर चतुर्थी को यहां सुंदरकांड का पाठ, गणेश स्तुति और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित होते हैं, लेकिन गणेश चतुर्थी पर विशेष उत्सव का आयोजन किया जाता है।
इसी तरह, सोजती गेट गणेश मंदिर और भीतरी शहर में जूनी मंडी स्थित इश्किया गणेश मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। जूनी मंडी में करीब 100 साल पुराना यह मंदिर युवाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। मान्यता है कि यहां मनोकामना मांगने पर रिश्ता जल्दी तय हो जाता है और प्रेमी-प्रेमिकाओं की मुरादें पूरी होती हैं। प्रत्येक बुधवार शाम को यहां मेला जैसा नजारा दिखता है।
शहर के प्रमुख मार्ग पर मिल रहीं प्रतिमाएं
शहर के विभिन्न प्रमुख मार्ग पर गणेश प्रतिमाएं सजी हैं, जहां से लोग छोटी से लेकर बड़ी तक विभिन्न आकार की गणेश प्रतिमाएं लेने पहुंच रहे हैं। इस बार इको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग विशेष रूप से बढ़ी है। बाजारों में 100 से लेकर 5000 रुपए तक की प्रतिमाएं मिल रही हैं। इनमें महाराष्ट्रियन थीम, बाल गणेश और पगड़ी वाली मूर्तियां विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बन रही हैं।
हर गली-मोहल्ले में गणपति बप्पा
जोधपुर के हर मोहल्ले और गली-गली में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है। इसके लिए अधिकांश इलाकों में एक दिन पहले ही अलग-अलग शैली में पंडाल सजाए गए हैं और मकानों के मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमाएं विराजमान की जा रही हैं। स्थानीय निवासी अपने घरों में छोटी प्रतिमाएं स्थापित करके विधिवत पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
शहर के विभिन्न इलाकों में सामुदायिक पंडाल भी लगाए गए हैं, जहां 2 से 18 फीट तक की ऊंची गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। झूले में बैठे गणेश, ज्ञान मुद्रा में विराजमान गणपति, और बाल स्वरूप में गणेश की अलग-अलग मुद्राओं की प्रतिमाएं देखने को मिल रही हैं।
यह त्योहार 9 दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, आरती और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित होंगे। गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर जोधपुर में श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।
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