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जिला अस्पताल में एक साथ दो सुविधाओं का विस्तार होने वाला है। जहां 7 से 10 दिन के भीतर ही जिलेवासियों को अस्पताल में दो ऑपरेशन थिएटर की सुविधा शुरू होने वाली है वहीं प्रसूता महिलाओं को 50 बेड के अतिरिक्त वार्ड की सुविधा जल्द ही मिलनी शुरू हो जाएगी।
पीएमओ डॉ. वीरेंद्र महात्मा ने बताया कि दूसरी ऑपरेशन टेबल शुरू करने के लिए जरूरी उपकरण व स्टाफ उपलब्ध है। ऐसे में शीघ्र ही एक दिन में दो ऑपरेशन कर मरीजों को राहत देने का प्रयास किया जाएगा। जिला महिला अस्पताल में भी 50 बेड वाले वार्ड में लिफ्ट लगाने का काम व फायर सेफ्टी उपकरण लगाने का पूरा हो गया है। कुछ छोटा-बड़ा कार्य शेष है उसके भी शीघ्र ही पूर्ण होने के बाद उसे हैंड ओवर ले लिया जाएगा।
जिला अस्पताल में फिलहाल 100 से 125 छोटे बड़े ऑपरेशन हो रहे हैं। ऐसे में उनको प्राथमिकता दी जाती है जिनकी स्थिति या तो गंभीर है या ज्यादा जरूरत है। इसका कारण ऑपरेशन एक ही टेबल पर होते हैं। अब दो टेबल पर ऑपरेशन शुरू होने से एक महीने में छोटे बड़े 200 से 250 छोटे बड़े ऑपरेशन हो सकेंगे। इससे ऑपरेशन के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अतिरिक्त 50 बेड का नया वार्ड बनकर तैयार है। हालांकि वार्ड तो आरएसआरडीसी की ओर से एक साल पहले ही बन गया था। मगर इसमें लिफ्ट का काम लंबे समय से अटका हुआ था। भास्कर ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित कर मुद्दे को उजागर किया था। इसके बाद आरएसआरडीसी की ओर से तीन महीने पहले ही लिफ्ट का कार्य पूरा कर दिया गया। मगर फायर सेफ्टी का काम नहीं हुआ था। अब फायर सेफ्टी का कार्य भी पूर्ण हो चुका है।
ऐसे में उम्मीद है कि थोड़ा फिनिशिंग का कार्य पूर्ण होते ही वार्ड शुरू कर दिया जाएगा। पीएमओ डॉ. वीरेंद्र महात्मा ने बताया कि दूसरी मंजिल पर नया वार्ड विकसित किया जा रहा है। इसमें 50 बेड लगाए जाएंगे। डॉ. निहाल सिंह ने बताया कि बड़ा अस्पताल होने से आस-पास क्षेत्र के ग्रामीण भी यहीं इलाज के लिए आते हैं।
रोज 15-20 महिलाओं के प्रसव होने से भर्ती करना पड़ता है। हर माह 350 से 400 प्रसव होते हैं। इनमें 80 केस सीजेरियन के होते हैं। सामान्य डिलेवरी होने पर 48 घंटे व ऑपरेशन होने पर कम से कम 5 से 7 दिन तक अस्पताल में भर्ती रखना पड़ता है। ऐसे में कम बेड के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार भर्ती प्रसूताओं को एक या दो दिन पहले ही डिस्चार्ज करना पड़ता है। दरअसल जिला अस्पताल में प्रसूताओं की बढ़ती संख्या के कारण जगह की कमी से समस्याएं पैदा हो रही है।
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