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भदेसर उपखंड के धीर जी का खेड़ा गांव के रहने वाले सीताराम गुर्जर का शनिवार को दुखद निधन हो गया। 57 साल के सीताराम गुर्जर लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी भी रह चुके थे। शनिवार सुबह वे अपने घर की छत से सीढ़ियां उतर रहे थे, तभी अचानक पैर फिसल गया और वे नीचे ग
परिजन तुरंत उन्हें चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय के अक्षर हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें उदयपुर रेफर कर दिया। लेकिन उदयपुर ले जाते समय रास्ते में ही सीताराम गुर्जर की मौत हो गई।
मौत के बाद उनके परिजन शव को लेकर भदेसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे ताकि पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा सके। लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों ने यह कहकर मना कर दिया कि यहां पोस्टमार्टम की सुविधा नहीं है। परिजन बार-बार निवेदन करते रहे, गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी।
हारकर परिजन शव को लेकर मंडफिया हॉस्पिटल पहुंचे। वहां के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने भदेसर में पोस्टमार्टम सुविधा न होने पर हैरानी जताई और नाराजगी भी जाहिर की। मंडफिया हॉस्पिटल में परिजन करीब दो घंटे तक इंतजार करते रहे। आखिरकार दोपहर करीब 3 बजे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हो सकी।
मृतक सीताराम गुर्जर के बेटे ने कहा, “हम अपने पिता के शव को लेकर एक जगह से दूसरी जगह भटकते रहे, लेकिन भदेसर जैसे बड़े उपखंड अस्पताल में पोस्टमार्टम की सुविधा नहीं मिली। यह हमारे लिए बहुत दुखद और अपमानजनक रहा।”
गांव वालों ने भी इस पूरे मामले पर नाराजगी जताई। धीर जी का खेड़ा के ग्रामीणों ने कहा कि भदेसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उपखंड स्तर का हॉस्पिटल है, वहां ऐसी जरूरी सुविधा का ना होना शर्मनाक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए भदेसर अस्पताल में जरूरी सुविधाएं तुरंत शुरू की जाएं।
ग्रामीणों ने कहा कि जब किसी परिवार में ऐसा दुख आता है, तो उस समय सरकारी सिस्टम से थोड़ी सी मदद भी बहुत बड़ी राहत होती है। लेकिन यहां तो उन्हें उल्टा परेशानी और अपमान झेलना पड़ा।
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