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राजस्थान के भूगर्भ में पानी दिनों दिन कम होता जा रहा है। तमाम सरकारी प्रयासों के बाद भी अत्यधिक दोहन से भू गर्भ में पानी काफी कम बचा है। भूजल विभाग के कई रिपोर्ट बताती है कि भविष्य में जल संकट बढ़ेगा। साथ ही मौजूदा दौर में भूजल की चिंताजनक तस्वीर है।

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विभागीय अफसरों का कहना है कि नाडी, तालाब और अन्य जगहों पर एकत्र बारिश का पानी 3 फीट तक भाप बनकर हवा में उड़ जाता है। जबकि यही पानी अगर भूगर्भ में चला जाए तो बरसों तक इसका दोहन किया जा सकता है। इसकी कड़ी में रिचार्ज सॉफ्ट लगाने की शुरुआत की गई है। अब तक 10 जिलों में 251 वाटर रिचार्ज सॉफ्ट लग चुके हैं। 17 जिलों में अटल भूजल योजना और बाकी जिलों में कर्म भूमि योजना में लगाए जाएंगे। देश में अब तक सबसे ज्यादा राजस्थान में ही लगाए गए हैं। फिलहाल यह योजना गुजरात, हरियाणा, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि में चल रही है। इन राज्यों में राजस्थान अव्वल है।

प्रदेश में जयपुर में सबसे ज्यादा और अजमेर में सबसे कम बने हैं। हालांकि अभी शुरुआत हो रही है। एक वाटर रिचार्ज एक करोड़ लीटर तक पानी जमीन में डाल देता है। इसकी बनावट इस तरह है कि कोई कचरा या कंकर आदि रुकावट नहीं बनता। इसे 3 से लेकर 50 मीटर तक अधिकतम गहराई में सेट किया जाता है। यह जमीन के अंदर की स्थिति पर निर्भर करता है। ऊपर का दायरा डेढ़ मीटर चौड़ा होता है। बोरवेल पाइप आठ इंच का रखा जाता है। ऊपर के घेरे में सारा कचरा मिट्टी अलग हो जाती है।

जयपुर में सबसे ज्यादा रिचार्ज सॉफ्ट बनाए

अटल भूजल योजना के तहत शामिल 17 जिलों में से अब तक सबसे ज्यादा 142 वाटर रिचार्ज सॉफ्ट जयपुर जिले में बनाए गए हैं। जबकि सीकर में 15, झुंझुनूं में 10, भीलवाड़ा में 20, राजसमंद में 18, चित्तौड़गढ़ में 15, हनुमानगढ़ में 10, कोटा में 8, बारां में 7 और अजमेर में 6 सिस्टम मानसून पूर्व स्थापित हो गए हैं। अन्य कई स्थानों पर जहां संभव है मानसून के दौरान बनाए जा रहे हैं।



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