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देश और सेना, इन दोनों के मामले को छोड़ दें तो सियासत में पक्ष-विपक्ष कभी एक राय नहीं होते। सड़क से सदन तक एक दूसरे का विरोध, टांग खिचाई ही करते दिखते हैं। लेकिन, गत दिनों सुखाड़िया विश्वविद्यालय में औरंगजेब के बयान पर चले घटनाक्रम ने यह कर दिखाया। भाजपा
नवंबर 2020: 1 उपचुनाव के लिए शत्रु का शत्रु बना दोस्त
डूंगरपुर जिला परिषद उपचुनाव में भारत आदिवासी पार्टी की डूंगरपुर में बढ़ती लोकप्रियता बेचैनी बढ़ा रही थी। इसे देख कांग्रेस और भाजपा एक हुए। अनौपचारिक गठबंधन हुआ। एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारे। वोट साझा किए और बीएपी उम्मीदवार को एक वोट से हराया। बीएपी प्रमुख राजकुमार रोत ने एक कैंपेन चलाया था कि शत्रु का शत्रु बना दोस्त। घटना राष्ट्रीय राजनीति में चर्चित रही।
मार्च 2022: कागजों में खड़ा कर दिया था विश्वविद्यालय
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सीकर में गुरुकुल विवि के फर्जीवाड़ा विधानसभा में उठाया। प्रश्न उठाया कि विवि का भवन तक नहीं है, कागजों में विवि कैसे बन गया? मामले में सुविवि के पूर्व कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह को निलंबित कर मुकदमा दर्ज कराने के लिए विपक्षी भाजपा से सत्ताधारी कांग्रेस एक हो गईं। मुकदमा दर्ज हुआ। अमेरिका सिंह को पद से जाना पड़ा।
जुलाई 2025: 1 बंगला खाली काराने के लिए एकजुटता
आरएलपी प्रमुख व सांसद हनुमान बेनीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं को जयपुर में सरकारी बंगले और विधायक आवास खाली करने का नोटिस दिए। बेनीवाल के आवास का बिजली कनेक्शन काट दिया। इस मामले में सियासत इतनी आगे बढ़ी कि बीजेपी, कांग्रेस के सभी बेनीवाल विरोधी नेता एकजुट हो गए। बेनीवाल को बंगला खाली करने के आदेश भी हुए लेकिन वे कोर्ट से इसके विरोध में स्टे ले आए।
…और जब 1 अफसर के लिए साथ आईं दोनों मुख्य पार्टियां
आईपीएस दिनेश एमएन 2004-07 तक उदयपुर में अधीक्षक थे। इस बीच उनका नाम एनकाउंटर से जुड़ने के चलते विवादों मे आ गया। एमएन का अलवर तबादला हो गया, जहां बाद में फर्जी एनकाउंटर के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के खिलाफ कांग्रेस-भाजपा के लगभग सभी नेता मैदान में उतरे। मेवाड़ के कई कस्बों में बंद भी हुआ था। एमएन इन एनकाउंटर मामलों में बरी हो चुके हैं।
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