राजस्थान हाईकोर्ट ने एक्स सर्विसमैन कोटे से सरकारी नौकरी पा चुके पूर्व सैनिक की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि एक बार जब कोई व्यक्ति सरकारी सेवा में नियमित नियुक्ति प्राप्त कर लेता है तो किसी अन्य पद का तुलनात्मक आकर्षण उसे आरक्षण का लाभ लेने का
एक्स सर्विसमैन का आरक्षण पूर्व सैनिकों को प्रारंभिक पुनर्नियुक्ति (री-अपॉइंटमेंट) की सुविधा के लिए एकमुश्त लाभ के रूप में कार्य करता है। यह सरकारी सेवा में प्रगति के लिए एक स्थायी साधन नहीं है। यह आदेश जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने पूर्व सैनिक नरेन्द्र सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया।
याचिका में कहा गया था कि याची ग्राम विकास अधिकारी के पद पर 13 मार्च 2023 से प्रोबेशन पर कार्यरत है। उसने जूनियर अकाउंटेंट भर्ती-2023 में एक्स सर्विसमैन ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में आवेदन किया था। उसके अपनी कैटेगरी में कट ऑफ से भी ज्यादा मार्क्स थे। लेकिन उसे यह कहते हुए इस कैटेगरी में शामिल नहीं किया गया कि वह एक बार एक्स सर्विसमैन आरक्षण का लाभ ले चुका है। जबकि वह प्रोबेशनरी ट्रेनी के रूप में कार्य कर रहा है। जो अस्थायी पद है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक्स सर्विसमैन की याचिका को खारिज कर दिया।
प्रोबेशनरी कर्मचारी अस्थायी नहीं
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा- अदालत अपने पिछले आदेशों में यह स्पष्ट कर चुकी है कि प्रोबेशनर स्थिति के बावजूद मूल पद पर आसीन कर्मचारी को अस्थायी, आकस्मिक अथवा संविदा कर्मचारी नहीं माना जा सकता है।
उसकी नियुक्ति मूल पद पर उचित प्रक्रिया के माध्यम से होती है। ऐसे में याचिकाकर्ता का यह कहना है कि वह सरकार में वीडीओ के पद पर अस्थायी अथवा संविदा के रूप में कार्यरत है, इसे सही नहीं माना जा सकता है।
किसी अन्य पद का आकर्षण, आरक्षण का अधिकार नहीं
अदालत ने कहा- याचिकाकर्ता का यह तर्क कि वीडीओ का वेतनमान कनिष्ठ लेखाकार से कम है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। एक बार जब कोई व्यक्ति सरकारी सेवा में नियमित नियुक्ति प्राप्त कर लेता है तो किसी अन्य पद का तुलनात्मक आकर्षण उसे आरक्षण का लाभ लेने का अधिकार नहीं देता, जो समाप्त हो चुका है।
कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ता के तर्क को स्वीकार करने से एक असामान्य स्थिति पैदा हो जाएगी। इससे आरक्षण का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है, जो कि बेरोजगार भूतपूर्व सैनिकों को लाभ प्रदान करना है।
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