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पड़ियाल के रणीसर स्थित इसी समाधि स्थल को लेकर चल रहा विवाद (फाइल फोटो)

फलोदी के घंटियाली पंचायत समिति में पड़ियाल रणीसर स्थित बिश्नोई समाज के आस्था केंद्र पर राजस्थान हाईकोर्ट ने किसी तरह की कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है। जस्टिस कुलदीप माथुर की कोर्ट के आदेशानुसार यहां गौ भक्त भारमल खावा सेवा समिति की ओर से ग्राम पंचायत

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दरअसल, याचिकाकर्ता शहीद गौ भक्त श्री भारमल खावा सेवा समिति, रणीसर के चेयरमैन बक्सूराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने एडवोकेट चयन बोथरा, प्रियांशु मेहता और सार्थक आसोपा के साथ कोर्ट में पैरवी की। सीनियर एडवोकेट डॉ. आचार्य ने कोर्ट को बताया कि 15 मई को ग्राम पंचायत के अधिकारियों, एसडीओ, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस और संबंधित क्षेत्र के एसएचओ के बीच हुई बैठक के निर्णय के अनुसार, याचिकाकर्ता ने विवादित भूमि के संबंध में पट्टा जारी करने के लिए ग्राम पंचायत के समक्ष आवेदन दायर किया है।

वर्ष 1769 से है समाधि स्थल, हर साल 4 मेले

विश्नोई समाज के खावा गौत्र के लिए रणीसर गांव की आबादी भूमि के खसरा संख्या 174 में स्थित यह स्थल प्रमुख माना जाता है। बताया जाता है कि वर्ष 1769 से यह समाधि स्थल है, जो गौवंश की रक्षा में प्राण न्यौछावर करने वाले गौ भक्त भारमल खावा की स्मृति में बनाया गया था। हर साल यहां 4 मेले लगते हैं, जहां बड़ी संख्या में बिश्नोई समाज के लोग पहुंचते हैं। वर्ष 2001 में तत्कालीन ग्राम पंचायत की ओर से इस जमीन को खावा गौत्र के पूर्वजों की बताते हुए यहां किसी तरह के निर्माण पर अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी किया था। हाल ही में इसे अतिक्रमण बताते हुए कार्रवाई के लिए कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

ग्राम पंचायत की विरोधाभासी कार्रवाई

उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि याचिकाकर्ता के लिए हैरानी की बात यह है कि जब उसका पट्टा/नियमितीकरण का आवेदन ग्राम पंचायत पड़ियाल के समक्ष लंबित था, उसी दौरान ग्राम पंचायत पड़ियाल ने कोर्ट में सिविल रिट पेटीशन दायर की। इसमें ग्राम पंचायत ने उप-विभागीय अधिकारी फलोदी को निर्देश देने की मांग की थी कि वे पुलिस सहायता के साथ कथित अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक आदेश जारी करें।

पूर्व के विचाराधीन आदेश की उलझन

याचि के अधिवक्ता ने बताया कि इस न्यायालय की एक समन्वयी पीठ ने 1 जुलाई को एकपक्षीय आदेश पारित करते हुए ग्राम पंचायत पड़ियाल को निर्देश दिया था कि वह पुलिस अधीक्षक फलोदी के समक्ष प्रतिवेदन दाखिल करे। साथ ही पुलिस अधीक्षक फलोदी को निर्देश दिया गया था कि वह कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखते हुए कथित अतिक्रमण हटाने के लिए ग्राम पंचायत पड़ियाल को आवश्यक पुलिस सहायता प्रदान करे।

अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि 1 जुलाई का यह आदेश वर्तमान याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति में पारित किया गया था और संभवतः न्यायालय को इस तथ्य से अवगत नहीं कराया गया था कि 15 मई की बैठक के निर्णय के अनुसार विवादित भूमि के पट्टा/नियमितीकरण का आवेदन ग्राम पंचायत के समक्ष लंबित है।

पूर्व का आदेश प्रारंभिक रूप से, पूरे तथ्य संज्ञान में नहीं लाए

जस्टिस माथुर ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और समन्वयी पीठ द्वारा पारित 1 जुलाई के आदेश का अध्ययन करने के बाद पाया कि यह आदेश लिमिन में (प्रारंभिक रूप से) पारित किया गया था। कोर्ट ने यह भी पाया कि ग्राम पंचायत पड़ियाल के समक्ष पट्टा/नियमितीकरण आवेदन के लंबित होने के तथ्य को समन्वयी पीठ के ज्ञान में नहीं लाया गया था।

इसे देखते हुए कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों तथा पुलिस अधीक्षक फलोदी को निर्देश दिया कि वे तब तक विवादित भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने के लिए कोई जबरदस्ती कार्रवाई न करें, जब तक कि याचिकाकर्ता द्वारा पट्टा/नियमितीकरण के लिए दायर आवेदन पर ग्राम पंचायत पड़ियाल द्वारा निश्चित निर्णय नहीं लिया जाता।

इस मामले में प्रतिवादियों के रूप में ग्राम पंचायत पड़ियाल (राजस्व ग्राम रणीसर, पंचायत समिति घंटियाली, जिला फलोदी), इसके सरपंच के माध्यम से, ग्राम विकास अधिकारी पड़ियाल और पुलिस अधीक्षक फलोदी शामिल हैं। कोर्ट ने इससे संबंधित सभी लंबित आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया है।



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