![]()
ईटवाया गांव में स्थित बलूजी भोमियाजी का मंदिर।
जिला मुख्यालय से दूर उपखंड एवं उप तहसील पादरू का अंतरिम गांव ईटवाया अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है। इस गांव की स्थापना विक्रम संवत 1971 (लगभग 110 वर्ष पूर्व) में राजपुरोहित मोतीजी मनणा, हकमाजी मथर और सवाजी लुहारिया इन तीन परिवारो
ईटवाया 1981 में राजस्व गांव घोषित हुआ और 2014 में पादरू से अलग होकर पंचायत बना। पहले यह गांव मानपुरा के साथ संयुक्त था, लेकिन अब मानपुरा को भी अलग पंचायत बनाने की घोषणा हो चुकी है। गांव का नाम यहां बने प्राचीन ईंटों के कुएं से जुड़ा हुआ है। यहां प्राचीन शिव मंदिर, बलूजी भोमियाजी मंदिर, झरड़ाजी जुझार की छतरी और संत मानाराम जैसे महात्माओं की तपोभूमि है, जो स्थानीय आस्था का केंद्र हैं। यहां के अधिकांश लोग कृषि व पशुपालन पर आश्रित हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण रोजगार और कारोबार के लिए अन्य राज्यों की ओर जाते हैं।
पंचायत का लेखा-जोखा
जनसंख्या : 5276 साक्षरता दर : 65 % जिला मुख्यालय से दूरी : 55 किमी कनेक्टिविटी : भारतमाला से जुड़ा है पहचान : प्राचीन ईंटों का कुआं
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments