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राजस्थान का देवस्थान विभाग अब केवल दान-दक्षिणा और चढ़ावे तक सीमित नहीं है। विभाग अपनी खदानों और संपत्तियों से भी मोटा राजस्व कमा रहा है। वार्षिक प्रगति रिपोर्ट (2024–25) के अनुसार उदयपुर के श्री ऋषभदेव मंदिर, ठाकुर श्याम सुंदरजी मंदिर और कोटा के झालर
इसी तरह विभाग की 2136 आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों में से 1940 संपत्तियां किराये पर दी गई हैं। इनसे विभाग को 8.10 करोड़ रुपए से अधिक किराया प्राप्त हुआ। राजस्थान समेत उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड की जमीनों से भी आय जोड़ें तो कुल किराया 8.39 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। बता दें कि देवस्थान विभाग राज्य में लगभग 59,413 मंदिरों का रखरखाव करता है, जिनमें से 390 राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी मंदिर हैं।
ठाकुर श्याम सुंदरजी की 24 खदानें, आय 22.53 लाख
उदयपुर जिले के ऋषभदेव मंदिर की जमीन पर सबसे ज्यादा 25 खदानें आवंटित हैं, जिनसे 2024-25 में 10.69 लाख रुपए की कमाई हुई। यहां से निकलने वाला विश्व प्रसिद्ध ग्रीन मार्बल कभी भारी डिमांड में था, लेकिन ग्रेनाइट और टाइल्स के बाजार में आने से इसकी मांग घटी है। वहीं, राजस्व कमाई में उदयपुर का ठाकुर श्याम सुंदरजी मंदिर आगे रहा। इसकी 24 खदानों से 22.53 लाख की आय हुई। कोटा के झालरापाटन स्थित द्वारिकाधीश मंदिर की जमीन पर 6 खदानें हैं, जिनसे 3.43 लाख रुपए राजस्व मिला।
उत्तराखंड-यूपी में भी जमीनें… राजस्थान के अलावा देवस्थान विभाग की जमीनें मथुरा, वाराणसी, हरिद्वार, उत्तरकाशी और द्वारिका जैसे धार्मिक शहरों में भी हैं। यहां 191 संपत्तियों में से 186 को किराये पर दिया गया है। इससे विभाग को ₹28.06 लाख का किराया मिला।
“विभाग की जमीनों से वार्षिक किराया मिलता है। इसमें हर तीन साल में किराये में बढ़ोतरी होती है। हेक्टेयर के हिसाब से जमीन किराये पर दी है। इसमें मिनरल्स के हिसाब से किराया कम-ज्यादा है। आखिरी बार वर्ष 2011 में खदानो की नीलामी की गई।”
-जतिन गांधी, सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग
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