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गुढ़ागौड़जी क्षेत्र के सीथल गांव में श्मशान भूमि और उसके आसपास रहस्यमयी पौधों के उगने से हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों ने इन पौधों को अवैध गांजा (कैनाबिस) मानते हुए पुलिस-प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन पौधों का उपयोग
मादक पौधों का आतंक, युवा पीढ़ी पर मंडरा रहा खतरा
झुंझुनूं के गुढ़ागौड़जी क्षेत्र में स्थित सीथल गांव इन दिनों एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। गांव के सार्वजनिक स्थानों, श्मशान भूमि और सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में संदिग्ध पौधे उग आए हैं, जिन्हें ग्रामीण गांजे के पौधे मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये पौधे युवा पीढ़ी को आसानी से और मुफ्त में नशा उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे उनकी जिंदगी बर्बाद हो रही है।
खुलेआम नशा: चीलम और सिगरेट में हो रहा सेवन
ग्रामीण मोहनलाल मीणा ने बताया कि गांव के युवा और यहां ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर इन पौधों की पत्तियों को तोड़कर हाथों से रगड़ते हैं और फिर चीलम या सिगरेट में भरकर इसका सेवन कर रहे हैं। इस चौंकाने वाले मामले ने गांव के बुजुर्गों और महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है। वे मानते हैं कि अगर इन पौधों को जल्द ही नष्ट नहीं किया गया, तो आसपास के गांवों के युवा भी नशे की गिरफ्त में आ जाएंगे।
धार्मिक स्थल पर नशे का फैलाव, ग्रामीणों में रोष
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी भारी रोष है कि मोक्ष धाम जैसी पवित्र जगह पर मादक पौधों का फैलाव हो रहा है। उन्होंने इसे सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद गंभीर बताया है। ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन से इन पौधों की जांच कराने और उन्हें तुरंत नष्ट करने की अपील की है। साथ ही, यह भी जांच की जाए कि ये पौधे प्राकृतिक रूप से उगे हैं या किसी ने जानबूझकर इन्हें उगाया है।
ग्रामीणों की मांग: दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
सीथल गांव के ग्रामीण प्रशासन से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका सवाल है कि इतने बड़े पैमाने पर मादक पौधे कैसे फैल गए? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या किसी की सुनियोजित साजिश? ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि यह साजिश है, तो दोषियों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। गांव के एक ग्रामीण, मोहनलाल ने कहा, “हम गांववाले नशे के खिलाफ हैं। श्मशान भूमि में ऐसे पौधे होना हमारे लिए शर्म की बात है। प्रशासन को जल्द कदम उठाना चाहिए।” ग्रामीणों की नजरें अब पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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