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मुख्यमंत्री की डीपीसी की पेंडेंसी को लेकर नाराजगी के बाद अब इस प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है। राज्य के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की (पदोन्नति) डीपीसी की पेंडेंसी खत्म करने और टाइम बाउंड करने के लिए नई पहल की गई है। अब अफसरों को आरपीए
विभाग ने इसके लिए एक पोर्टल भी बनाया है। इस पोर्टल के जरिए ही अब सभी अधिकारियों की डीपीसी ऑनलाइन होगी। हालांकि इसके संबंधित दस्तावेज पहले ही हार्ड कोपी में आरपीएससी को भिजवाने होंगे। यही नहीं, विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों की विभिन्न मुद्दों पर चल रही जांचें भी ऑनलाइन ही होंगी। दोनों व्यवस्थाओं के ऑनलाइन होने के साथ ही मैन पावर की दिक्कत कम होगी, समय पर ऑटो सिस्टम से पदोन्नति सुनिश्चित होगी और जांचों का काम भी कम समय में पूरा हो सकेगा। गौरतलब है कि सीएम भजनलाल शर्मा ने 7 मार्च को डीपीसी पेंडेंसी बढ़ने पर नाराजगी प्रकट की थी और अफसरों की खिंचाई की थी। उसके बाद नया सिस्टम लागू किया जा रहा है।
3 साल का काम अब 3 माह में पूरा होगा
विभागों के अधिकारियों की डीपीसी के जिस जांच में 2 से 3 साल लगते थे, वह 2 से 3 माह में पूरी हो सकेगी। नई व्यवस्था बजट में घोषित इंटीग्रेटेड ह्यूमन रिसोर्सेज की बड़ी शुरुआत है। वर्तमान में आरएएस की डीपीसी ऑनलाइन ही होगी है, जो हमेशा एक क्लिक में पूरी हो जाती है।
यानी जो भी डीपीसी के पद खाली होंगे, ऑनलाइन सिस्टम से उसे निचले पद से कर्मचारी-अधिकारी प्रमोट हो जाएगा। अधिकारियों की अलग-अलग तरह की शिकायतों की जांचों में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। जांच की व्यवस्था इस पोर्टल के माध्यम से होने पर जिनकी जांच का मामला होगा, उन्हें अपने पक्ष के सभी दस्तावेज इसी पर अपलोड कर देने होंगे, जिससे संबंधित जांच अधिकारी उनकी जांच कर लेंगे। राज्य में ऐसी जांचों के 13 हजार से अधिक मामले पेंडिंग हैं।
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