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फल आने से पहले ही फसल की पत्तियां भी बिक जाएं तो किसी किसान के लिए इससे बेहतर दोहरी आमदनी क्या होगी? दौसा जिले के मीतरवाड़ी गांव निवासी किसान रामजीलाल शर्मा ने ऐसा ही आइडिया निकालकर अपनी आमदनी बढ़ा ली है। वह चने पर फल आने से पहले उसकी कच्ची पत्तियां

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अब चने पर फूल आने से पहले 35 दिन की फसल के ऊपरी कच्चे पत्ते तोड़ता हूं। दस दिन बाद फिर से पत्ते तोड़ने लायक हो जाते हैं। इन्हें सुखाने के लिए खेत पर सोलर ड्रायर बना रखा है। पॉली कार्बोनेट शीट से इसे बनाकर अंदर रैक लगा रखी है। इसमें पत्ते सुखाकर 50-50 ग्राम की पैकिंग बनाकर सब्जी बनाने के लिए बेचता हूं। पत्तियां तोड़ने से चने में फुटान भी अच्छा होता है। खेत पर बील के 100 से ज्यादा पेड़ हैं। जूस के लिए मंडी में बेचने के बाद बचे बील की गिरी निकालता, उसे सोलर ड्रायर में सुखाकर बेचता हूं। अब बील की पत्तियां भी सुखाकर बेचना शुरू करूंगा।

किसान रामजीलाल ने बताया- 2001 में खेती संभाली तब रसायन के उपयोग से मिट्टी खराब हो रही थी। मैंने जैविक खेती शुरू की। इसके लिए जोबनेर कृषि विवि जाकर ट्रेनिंग ली। खेत पर 2004 में 25 मीट्रिक टन वर्मी कम्पोस्ट की यूनिट लगाई। अब 150 मीट्रिक टन वर्मी कम्पोस्ट की हैचरी भी है। अलग-अलग पैकिंग में दूसरे किसानों को वर्मी कम्पोस्ट बेचता हूं। बायो गैस संयंत्र लगा रखा है। रसोई की गैस की आपूर्ति गोबर गैस से ही पूरी हो जाती है।

शर्मा ने बताया, नींबू, मौसमी, कीनू, माल्टा की जड़ों में दीमक नहीं लगती। इसलिए इनकी जड़ों के पास ही आम के पौधे लगा दिए ताकि उन्हें दीमक से बचाया जा सके। मेड़ पर सहजन के 1250 पेड़ लगा रखे हैं, जिनकी फलियां दिल्ली में बेचता हूं। 2005 में मौसमी लगाई थी। इसके बीच में बची जगह में बिल्व के पेड़ लगाए। अब किसानों को उन्नत खेती के तरीके सिखाता हूं।



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