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मरुभूमि बीकानेर की धरती अब हरियाली के साथ पोषण क्रांति की भूमि बनेगी। घर-घर सहजन अभियान में संभाग के जिलों में विकसित 115 जन पौधशालाओं में तैयार 5 लाख सहजन के पौधे अब आमजन को निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। सहजन की फली इतनी पोषक होती है कि लगातार सेवन से
इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए डूंगर कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर और संयुक्त राष्ट्र के लैंड फॉर लाइफ अवॉर्ड विजेता पर्यावरणविद् श्याम सुंदर ज्याणी ने घर-घर सहजन अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान केवल पौधे लगाने का नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और सामुदायिक भागीदारी का साझा आंदोलन है।
सहजन के 5 बड़े फायदे
1. इम्युनिटी बूस्टर: सहजन की पत्तियां विटामिन सी से भरपूर होती हैं।
2. हड्डियों की मजबूती: दूध से अधिक कैल्शियम, बच्चों और महिलाओं के लिए फायदेमंद।
3. ब्लड प्रेशर कंट्रोल: इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट हृदय स्वास्थ्य को दुरुस्त रखते हैं।
4. कुपोषण से लड़ाई: प्रोटीन और आयरन की प्रचुरता एनीमिया रोकने में सहायक।
5. पाचन और डिटॉक्स: सहजन शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है।
सहजन दुनिया भर में माना जाता है सुपरफूड
सहजन की पत्तियां गाय के दूध से अधिक कैल्शियम और गाजर से अधिक विटामिन ‘ए’ देती हैं। इसकी फलियां आयरन और प्रोटीन से भरपूर हैं, जो एनीमिया और कुपोषण के खिलाफ कारगर हैं। इसके फूल और जड़ें औषधीय गुणों से भरपूर हैं। यह पौधा रेतीली व खारी भूमि में भी आसानी से पनपता है, जो राजस्थान की जलवायु के लिए उपयुक्त है।
सहजन पर लगने वाले फूल परागणकर्ताओं को आकर्षित करते हैं, जिससे स्थानीय जैव विविधता को भी बल मिलता है। अकेले बीकानेर जिले में 90 जन पौध शालाएं विकसित हुईं। संभाग के अन्य जिलों और सीकर में भी पौध शालाएं स्थापित की गईं है। मनरेगा और वन विभाग के सहयोग से हनुमानगढ़, बाड़मेर और श्रीगंगानगर में करीब एक लाख पौधे और विकसित किए गए हैं। इन पौध शालाओं को तैयार करने में स्थानीय विद्यालयों के शिक्षक-विद्यार्थियों की सहभागिता रही।
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