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भरतपुर| झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने की घटना के बाद भरतपुर प्रशासन ने भी एहतियातन सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। नोडल अधिकारी डीईओ सीनियर सेकेंडरी सुरेंद्र गोपालिया की जांच रिपोर्ट में जिले के 70 स्कूल कक्षों को जमींदोज करने की सिफारिश की गई थी। मगर कलेक

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जर्जर भवनों पर बढ़ी चिंता, समसा के जेईएन पर भरोसा नहीं

भरतपुर जिले के कई प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की इमारतें लंबे समय से जर्जर हालत में हैं। भास्कर ने ही अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था। झालावाड़ के समय मात्र 13 स्कूल ही जर्जर घोषित किए गए थे। वहीं घटना के बाद शाम तक हर ब्लॉक से आई रिपोर्ट के अनुसार 289 स्कूल जर्जर होने की रिपोर्ट कई स्कूलों के प्रधानाचार्य द्वारा पेश की गई थी। वहीं,समसा के जेईएन पर सवाल उठे थे, कि लाखों रुपए एईएन, जेईएन पर खर्च करने के बाद भी ये अधिकारी अपने कार्यालयों में ही बैठे रहते हैं। वहीं, जर्जर भवन में स्कूल के बच्चों का बैठकर पढ़ना बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठता, जिसके चलते अभिभावकों ने बार-बार कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

रिपोर्ट पर कलक्टर का संशय:-

नोडल अधिकारी ने निरीक्षण में 70 कमरों को खतरनाक बताते हुए तुरंत गिराने की रिपोर्ट दी थी। लेकिन कलक्टर का मानना है कि बिना पुख्ता तकनीकी आकलन केवल एक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। इसलिए अब पंचायत और ब्लॉक स्तर की अलग-अलग टीम मौके पर जाकर स्थिति का आकलन कर रही हैं।

^हमने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। कलक्टर की ओर से अलग से तकनीकी टीम जांच के लिए बनाई गई है। उसके बाद स्कूल कक्षों के जमींदोज की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। -सुरेंद्र गोपालिया , डीईओ



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