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राजस्थान में संविदा नियुक्तियों की अनिश्चितता और सीमित अवसरों से निराश होकर अब नर्सिंग, जीएनएम, फिजियोथेरेपी व डेंटल जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रशिक्षित युवा विदेशी नौकरियों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेष रूप से जर्मनी में भारतीय अभ्यर्थी बड़ी संख्या में
जर्मनी में प्रशिक्षित हेल्थ प्रोफेशनल्स की भारी मांग है। यहां भारतीय युवा शुरुआत में ही ₹2.75 से ₹3.75 लाख प्रतिमाह तक की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। करियर सलाहकार प्रतीक सैन ने बताया- जर्मनी उन देशों में अग्रणी है जो विदेशी नर्सिंग प्रोफेशनल्स को स्थायी नौकरी देता है। साथ ही उच्च वेतन और परिवार सहित जीवन स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है।
जर्मनी में कार्य के लिए B1 या B2 स्तर की जर्मन भाषा परीक्षा पास करना अनिवार्य है। यह प्रशिक्षण आमतौर पर 6 से 9 महीनों में पूरा किया जा सकता है। इसके बाद ऑफर लेटर मिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
ये परीक्षाएं जर्मनी के तीन अंतरराष्ट्रीय बोर्डों — ÖSD, TELC और Goethe — द्वारा आयोजित की जाती हैं। जर्मन भाषा न केवल जर्मनी में, बल्कि ऑस्ट्रिया, स्विट्ज़रलैंड और लक्ज़मबर्ग जैसे देशों में भी बोली जाती है। इसलिए भाषा का ज्ञान पूरे यूरोप में रोजगार के दरवाज़े खोलता है। भारत में कुछ ही संस्थान हैं जो इन बोर्डों से मान्यता प्राप्त हैं।
जर्मन भाषा विशेषज्ञ और अंतर्राष्ट्रीय करियर काउंसलर जितेंद्र सैन बताते हैं कि भाषा सीखने के साथ-साथ सही और प्रमाणिक मार्गदर्शन भी आवश्यक है। “यह सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, बल्कि एक सुरक्षित भविष्य के द्वार खोलने वाली प्रक्रिया है।”
विदेश में नौकरी के साथ कई लाभ मिलते हैं। इनमें ₹2.75–₹3.75 लाख मासिक वेतन, सरकारी यूनिवर्सिटी में मुफ्त उच्च शिक्षा शामिल है। साथ ही पति/पत्नी के लिए मुफ्त वीज़ा और बच्चों को ₹25,000 प्रति माह छात्रवृत्ति भी मिलती है।
3–4 वर्षों में स्थायी निवास (PR) का अवसर मिलता है। पूरे यूरोप में नौकरी के अवसर, हेल्थ इंश्योरेंस, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्य वातावरण जैसे लाभ भी प्राप्त होते हैं।
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