झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 86 हजार जर्जर क्लासरूम में पढ़ाई पर रोक लगा दी थी। आज जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ में सरकार ने कहा कि हमने जर्जर क्लासरूम का इस्तेमाल पूरी तरह से बं
इनके स्थान पर सरकार ने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो, इसे लेकर वैकल्पिक इंतजाम किए हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के वैकल्पिक इंतजाम की क्वालिटी और सुविधाओं की जांच का जिम्मा डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी को सौंपा है।
अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों को निर्देश दिया है कि वह 15 से 18 सितम्बर के बीच इन वैकल्पिक इंतजामातों का आकस्मिक निरीक्षण करके रिपोर्ट सौपेंगे।
टीनशेड, तंबू और टैंट लगाकर पढ़ाई करवा रहे
मामले में न्यायमित्र तन्मय ढंढ ने बताया- आज सरकार ने अदालत में कहा कि जिन स्कूलों में दूसरे अतिरिक्त कमरे हैं, वहां क्लास लगाई जा रही है। लेकिन जिन स्कूलों में अतिरिक्त क्लासरूम नहीं है। उन जगहों पर वैकल्पिक इंतजामातों के तहत अन्य सरकारी बिल्डिंग, निजी भवन में क्लास लगाई जा रही है।
इसके साथ ही टीनशेड, तंबू और टैंट लगाकर पढ़ाई कराई जा रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वैकल्पिक इंतजामातों में भी बच्चों की सुविधा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें पढ़ाई का अच्छा माहौल मिलना चाहिए। इसकी सही रिपोर्ट के लिए कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों को औचक निरीक्षण के निर्देश दिए हैं।

झालावाड़ स्कूल हादसे में 5 बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
झालावाड़ स्कूल हादसे में 7 बच्चों की मौत
करीब दो महीने पहले 25 जुलाई को झालावाड़ जिले के पिपलोदी स्कूल हादसे में 7 बच्चों की मौत हो गई थी। बच्चे सुबह क्लास रूम में बैठे हुए थे, तभी कमरे की छत गिर गई। इसमें क्लास में मौजूद 35 बच्चे दब गए थे।
घटना के बाद हाईकोर्ट के दो जजों ने मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया था। जिसे जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करके हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा हैं।
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