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पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अब पूर्व विघायक के नाते मिलने वाली पेंशन के लिए राजस्थान विधानसभा सचिवालय में फिर से आवेदन किया है। धनखड़ 1993 से 1998 तक किशनगढ़ सीट से कांग्रेस के विधायक रहे थे। पूर्व विधायक के तौर पर उन्हें जुलाई 2019 तक पेंशन मि

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विधानसभा सचिवालय ने धनखड़ की पेंशन आवेदन पर प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्हें उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा मंजूर होने की तारीख से पूर्व विधायक की पेंशन मिलना शुरू होगी।

सरकारी पद पर जाते ही पूर्व विधायक की पेंशन बंद हो जाती है, बंद और शुरू करवाने के लिए विधानसभा सचिवालय में आवेदन करना होता है

विधायक का कार्यकाल पूरा होते ही पूर्व विधायक की पेंशन चालू हो जाती है। पूर्व विधायक अगर किसी भी सरकार पद पर मनोनीत हो जाते हैं, मंत्री बन जाते हैं तो पेंशन बंद हो जाती है। पूर्व विधायक अगर किसी सरकारी पद पर चले जाते हैं तो विधानसभा सचिवालय को इसकी तय फॉर्मेट में सूचना दी जाती है, जिसके बाद पेंशन बंद हो जाती है। सरकारी पद से कार्यकाल पूरा होने के बाद विधानसभा सचिवालय को तय फॉर्मेट में आवेदन कर सूचना देनी होती है, जिसके बाद पेंशन फिर शुरू हो जाती है। जगदीप धनखड़ ने भी उसी प्रक्रिया के तहत आवेदन किया है।

धनखड़ को पूर्व उपराष्ट्रपति, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक की पेंशन मिलेगी

जगदीप धनखड़ को तीन तरह की पेंशन मिलेगी। धनखड़ को पूर्व उपराष्ट्रपति, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक की पेंशन मिलेगी। पूर्व राज्यपाल को पेंशन नहीं मिलती है, इसलिए धनखड़ को भी पूर्व राज्यपाल की पेंशन नहीं मिलेगी। धनखड़ 1989 से 1991 तक झुंझुनू से सासंद रहे, 1990 में ससंदीय कार्य राज्य मंत्री रहे। 1993 से 1998 तक किशनगढ़ से कांग्रेस विधायक रहे। धनखड़ 30 जुलाई 2019 से 18 जुलाई 2022 तक पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल रहे।



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