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जिला मुख्यालय से 24 किलोमीटर दूर बरड़िया गांव में नवरात्रि की नवमी पर देवासुर संग्राम का मंचन किया गया। इस आयोजन में देवताओं और दानवों के बीच लगभग 30 मिनट तक मल्ल युद्ध हुआ।
नवरात्रि की शुरुआत में बोए गए जवारों के विसर्जन के दौरान गांव के सभी प्रमुख देवरा और मंदिरों से ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला गया। यह जुलूस गांव के बाहर नीमच रोड पर स्थित देवनारायण मंदिर पर समाप्त हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए।
देवनारायण मंदिर प्रांगण में हर साल देवासुर संग्राम का मंचन होता है। देवनारायण की ‘पाति’ मिलने के बाद यह संग्राम शुरू हुआ, जिसमें देवता और राक्षस कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध लड़ते हैं। यह मंचन महिषासुर और देवी अंबा के युद्ध की पौराणिक कथा पर आधारित है, जहां देवी ने महिषासुर का वध किया था।
महिषासुर ने मोक्ष की प्रार्थना की थी, जिसके बाद देवी अंबा ने उसे वरदान दिया कि उसका नाम उनके नाम के साथ अमर रहेगा और उन्हें महिषासुरमर्दिनी देवी के नाम से भी जाना जाएगा। इसी आधार पर बरड़िया गांव में मां महिषासुरमर्दिनी देवी का मंदिर स्थित है, और इस मंदिर के सामने यह आयोजन वर्षों से किया जा रहा है।
गांव के 97 वर्षीय बुजुर्ग उदय सिंह चुंडावत ने बताया कि जब वे 4-5 साल के थे, तब उनके दादाजी और पिताजी ने उन्हें इस परंपरा के सनातन होने के बारे में बताया था। वे स्वयं 80 साल से इस देवासुर संग्राम को अपनी आंखों से देखते आ रहे हैं।
इस देवासुर संग्राम को देखने के लिए बरड़िया पंचायत के आसपास के गांव जैसे काजली, कोलवी खेड़ा, थडा, रठाजना, जीरण और मध्य प्रदेश के कई अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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