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नागौर जिला उपभोक्ता आयोग ने जल सप्लाई से जुड़े एक प्रकरण में फैसला सुनाते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (जलदाय) विभाग के अधिकारियों को सेवा का दोषी माना है और 57 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
नागौर निवासी रमेश तिवारी ने 27 सितंबर 2024 को विभाग के चीफ इंजीनियर सहित नागौर अधीक्षण अभियंता, अधिशाषी अभियंता व सहायता अभियंता के खिलाफ आयोग के समक्ष परिवाद पेश कर बताया कि उसने जलदाय विभाग से नियमानुसार शुल्क जमा करवाकर घरेलू वाटर सप्लाई कनेक्शन ले रखा है। पूरे साल के लिए एकमुश्त पेमेंट जमा करवाता रहा है। लेकिन पिछले 3 साल से परिवादी के घर पर जलदाय विभाग पानी की सप्लाई नहीं दे रहा। इससे उसे हर माह 800-900 रुपए खर्च कर पानी का टैंकर मंगवाना पड़ रहा है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत करवाकर वाटर सप्लाई करवाने के लिए एप्लीकेशन दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
तत्कालीन एईएन जयनारायण मेहरा से उनके कार्यालय में सपर्क किया तो उन्होंने कहा कि कनेक्शन कटवा लो। इसके बाद परिवादी ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया। सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष दीनदयाल प्रजापत व सदस्य प्रदीप कुमार शर्मा ने विभाग के चीफ इंजीनियर सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया कि 1 महीने में प्रार्थी के नाम जारी जल कनेक्शन के संबंध में समस्या का समाधान कर परिवादी से सेटिस्फेक्शन सर्टिफिकेट प्राप्त करें। साथ ही सेवा में दोष के कारण प्रार्थी को पहुंची शारीरिक, मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के 50 हजार रुपए व परिवाद व्यय के 7 हजार रुपए अदा करें। आयोग ने उक्त राशि को जलदाय विभाग के उन अधिकारी-कर्मचारी से वसूलने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने सेवा में दोषी पाया गया।
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