इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजी रिसर्च सेंटर और वेद अमृत संस्थान फाउंडेशन की ओर से खंडेलवाल वैश्य महासभा भवन में दो दिवसीय वैदिक चिंतन-मंथन कार्यक्रम का समापन हुआ। इसमें ज्योतिष, वेद, कर्मकांड, यज्ञ पद्धति और सनातन संस्कृति से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई। दे
ज्योतिषाचार्य पवन शर्मा ने कहा- देश में सनातन धर्म, वेद और यज्ञ की परंपराओं को बचाए रखने के लिए गुरुकुल परंपरा को दोबारा स्थापित करने की जरूरत है। उन्होंने राजस्थान सरकार से अपील की कि वैदिक संस्कृति, ज्योतिष, यज्ञ और मंत्र-तंत्र में निपुण आचार्यों के संरक्षण के लिए ‘सनातन बोर्ड’ का गठन किया जाए और संविधान में इनके लिए सुरक्षित स्थान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि देशभर में ज्योतिषियों के लिए आचार्य प्रोटक्शन बिल लाया जाए, जिससे तंत्र, मंत्र, यज्ञ और धर्म परंपरा को सुरक्षा मिल सके।

भारत की सनातन संस्कृति और ज्योतिष की रक्षा के लिए बना प्रस्ताव
वैदिक परंपराओं का अपमान नहीं होना चाहिए
राजस्थान संस्कृत अकादमी की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली ने कहा कि आजकल गली-गली में लोग बिना डिग्री और साधना के खुद को ज्योतिषाचार्य बताकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। इससे सनातन संस्कृति की जड़ें कमजोर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति वेद, शास्त्र, साधना और डिग्री के साथ ही ज्योतिष का अभ्यास करे, वही योग्य आचार्य कहलाने के योग्य है।
पंचांगों की एकरूपता की मांग
महाराष्ट्र, पुणे और हैदराबाद से आए विद्वानों ने चिंता जताई कि भारत में ज्योतिष तो एक है, लेकिन पंचांग अनेक हैं। उन्होंने कहा कि पंचांग निर्माताओं को एक मंच पर आकर एक मत से निर्णय लेना चाहिए, ताकि पंचांगों में भिन्नता समाप्त हो और आमजन भ्रमित न हों।

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री, महामंडलेश्वर, संस्कृत अकादमी निदेशक और देशभर से आए आचार्यों ने लिया हिस्सा
विद्वानों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में नेपाल के आचार्य पंडित हरिओम जोशी, गुरुग्राम के डॉ. एमएस आहूजा समेत देशभर से आए विद्वानों को सम्मानित किया गया। आयोजक और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिषाचार्य पवन शर्मा ने सभी को मोमेंटो, श्रीफल और शॉल देकर अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में टैरो कार्ड, हस्तरेखा, सामुद्रिक शास्त्र, यंत्र, मंत्र, तंत्र, यज्ञ विधि, सूर्य-चंद्र गणना और नवसंवत्सर निर्माण जैसे विषयों पर भी विद्वानों ने विचार साझा किए। अंत में सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया कि जल्द ही केंद्र सरकार से ‘आचार्य प्रोटक्शन बिल’ और वैदिक सनातन बोर्ड की मांग की जाएगी।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री धीरज गुर्जर, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी, पूर्व मंत्री पवन गोदारा, राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा के अध्यक्ष शिव सिंह शेखावत और महामंडलेश्वर बालकनाथ महाराज विशेष रूप से मौजूद रहे। सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने कहा कि गोवंश और सनातन धर्म की रक्षा के लिए ‘सनातन रक्षा एक्ट’ को संविधान से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
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