राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत दिव्यांग छात्रों की शिक्षा को बेहतर बनाने की मांग को लेकर राजस्व मंत्री हेमन्त मीणा और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में विशेष शिक्षकों की कमी को रेखांकित करते हुए आगामी शिक्षक भर्ती 2025 में हजारों पदों
शाला दर्पण पोर्टल के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में 70 हजार से अधिक दिव्यांग विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। लेकिन विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। भारतीय पुनर्वास परिषद, नई दिल्ली के निर्देशों के अनुसार दिव्यांग छात्रों को विशेष शिक्षकों द्वारा ही शिक्षा दी जानी चाहिए।

नई शिक्षा नीति 2020, आरटीई अधिनियम 2009, राजस्थान आरटीई नियम 2011 और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार प्रत्येक स्कूल में एक विशेष शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य है। ज्ञापन में पंचायत स्तर पर एक विशेष शिक्षक की नियुक्ति की मांग की गई है।
ज्ञापन में शिक्षक भर्ती 2025 में कम से कम 5000 पद शामिल करने का आग्रह किया गया है। साथ ही शिक्षक भर्ती 2022 के रिक्त पदों को बैकलॉग मानकर समायोजित करने की मांग भी की गई है। द्वितीय श्रेणी विशेष शिक्षा के 850 और व्याख्याता विशेष शिक्षा के 1000 पदों पर भर्ती की मांग भी शामिल है।
संस्कृत शिक्षा विभाग में 2000 विशेष शिक्षकों की भर्ती का प्रस्ताव रखा गया है, जहां अब तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है। राज्य में विशेष शिक्षा का पृथक कैडर सृजित करने की मांग भी की गई है। ज्ञापन देने वालों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र नियुक्तियां नहीं की गईं, तो हजारों दिव्यांग विद्यार्थियों का शैक्षणिक और सामाजिक भविष्य संकट में पड़ सकता है।
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