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विधायक छोटूसिंह भाटी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर जैसलमेर की पारंपरिक धरोहरों (मुंहबोली ओरण, गोचर, नदियां, नाले, कुएं, तालाब, खडीन एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों) के संरक्षण और पुनर्स्थापन की दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की है।
विधायक भाटी ने कहा कि जैसलमेर जिले की मुंहबोली ओरणें केवल भूमि का हिस्सा मात्र नहीं हैं, बल्कि यह ग्रामीण समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामुदायिक जीवन का आधार रही हैं। सदियों से इनका उपयोग पशुधन चराई, धार्मिक अनुष्ठानों, लोक पर्वों और सामुदायिक कार्यों के लिए होता आया है। इन ओरणों और प्राकृतिक स्रोतों ने मरुस्थलीय जीवन को संबल देने के साथ साथ पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता को भी बनाए रखा है। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान परिस्थितियों में इन धरोहरों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। कंपनियों को भूमि आवंटन और अतिक्रमण की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट सीमांकन न होने से विभागीय कार्रवाई में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। संरक्षण और देखरेख के ठोस प्रावधान नहीं होने के कारण इन धरोहरों का स्वरुप लगातार क्षीण हो रहा है। इस स्थिति का दुष्प्रभाव न केवल स्थानीय समाज और परंपराओं पर पड़ रहा है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरणीय संतुलन पर भी गहरा संकट उत्पन्न हो रहा है।
आेरण व गोचर भूमि का राजस्व मानचित्रों पर सीमांकन कर अभिलेखों में करें दर्ज: मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में विधायक भाटी ने मांग की है कि जैसलमेर जिले की सभी ओरणों एवं गोचर भूमि का राजस्व मानचित्रों पर सीमांकन कर उन्हें विधिवत अभिलेखों में दर्ज किया जाएं। इन धरोहरों को परंपरागत उपयोग के लिए संरक्षित घोषित कर उनके धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व की रक्षा के लिए ठोस नियमावली बनाई जाएं। ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय निकायों को संरक्षण और देखरेख की जिम्मेदारी दी जाएं तथा इसके लिए विशेष वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं।
संरक्षण नहीं हुआ तो उत्पन्न होगा गंभीर संकट: विधायक भाटी ने कहा कि यह विषय केवल भूमि या अभिलेख का नहीं है। बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर ग्रामीण आस्था और पर्यावरणीय संतुलन से सीधे जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इन धरोहरों से वंचित होना पड़ेगा और मरुस्थलीय समाज एवं पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर संकट उत्पन्न होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे इस विषय पर गंभीर संज्ञान लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी करें, ताकि जैसलमेर सहित पूरे प्रदेश की मुंहबोली ओरणों और प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा, संवर्धन और पुनर्स्थापन सुनिश्चित हो सके तथा ग्रामीण समाज को दीर्घकालिक राहत मिले।
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