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कम आय वाले परिवारों के बच्चों के विदेश में पढ़ने का सपना पूरा करने को 5 साल पहले ‘स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप’ योजना शुरू की गई थी। योजना के तहत देश-विदेश की टॉप यूनिवर्सिटी में 500 छात्रों को पढ़ने का मौका देने का दावा तो किया जाता है, लेकिन शिक्षा व
इन 3 केस के जरिए जानिए छात्रों की परेशानी
केस-1 बचत पढ़ाई में खर्च, अब स्कॉलरशिप की जरूरत शिखा इसरो में जॉब करती थीं। उन्हें कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पीएचडी में एडमिशन मिला है। पैसों की तंगी से फीस नहीं जमा करा पाई।
केस-2 स्कॉलरशिप ही सहारा रवि को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीजी में एडमिशन मिला है। वह स्कॉलरशिप का इंतजार कर रहे हैं। रवि साधारण परिवार से हैं। उन्हें इसी का सहारा है।
केस-3 नोटिफिकेशन में देरी से आवेदन नहीं कर पाईं प्रिया को ऑस्ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिला था। स्कॉलरशिप नोटिफिकेशन में देरी से आवेदन नहीं कर पाईं।
“गाइडलाइन प्रक्रिया में है। सरकार की स्वीकृति का इंतजार है। जो छात्र खुद फीस जमा कर विदेश पढ़ने जा रहे हैं और स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करेंगे, उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि उनके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख से कम हो।” -डॉ. विजेंद्र कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप
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