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सरिस्का के सघन जंगल वाले एरिया (CTH) का दायरा बदलने का विरोध सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद भी बीजेपी सरकार में वन राज्य मंत्री का साफ कहना है कि यहां टाइगर पूरी तरह सुरक्षित है। वन्यजीव को कोई खतरा नहीं है। हाल में खैरथल-तिजारा जिले का नाम भरथरी कर

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प्रदेश में हरियाली को लेकर कितना लक्ष्य रखा और कितना प्राप्त किया। लगाए गए पौधे कितने जीवित हैं?

पिछले साल राजस्थान में 7 करोड़ 35 लाख पौधे लगाए गए। इस साल 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य दिया था। सब संगठन व आमजन ने मिलकर करीब 11 करोड़ के आसपास पौधरोपण हो चुका है। हरियाला राजस्थान पर एक-एक फोटो भी अपलोड है। पौधे लगाना आसान है उनका संरक्षण भी होना चाहिए। हमारे मुख्यमंत्री ने मॉनिटरिंग भी तीन स्तर पर किया गया है। मॉनिटरिंग तीन एजेंसी करने में लगी है। औचक निरीक्षण भी करते हैं। जिसकी जानकारी वन विभाग के पास भी नहीं होती है। इसका मकसद यही है कि एक-एक पौधे को बचाने का प्रयास हो। हमने जितने पौधे लगाए उनमें से करीब 70 से 75 प्रतिशत पौधे जीवित हैं। जो पौधा खराब हुआ उसकी जगह अगले साल दूसरा पौध लगाते हैं।

पौधे लगाना आसान है लेकिन बिना पानी केैसे पालेंगे। अलवर में पानी का बड़ा संकट है?

जहां जहां पौधे लगाए हैं वहां बोरिंग की। सोरल बोरिंग लगाई है। सामाजिक संगठन, उद्योगपति व व्यापारियों की ओर से लगाए गए पौधे भी संरक्षित करने के प्रयास में है। एक पौधा मां के नाम लगाने वाले सब अभियान से जुड़े हुए हैं। वे भी पौधों को संरक्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। पूरा विश्वास आगे पूरा प्रदेश हरियालो राजस्थान के रूप में जाना जाएगा।

अलवर सर्किट हाउस में जनसुनवाई करते वन राज्य मंत्री संजय शर्मा।

अलवर सर्किट हाउस में जनसुनवाई करते वन राज्य मंत्री संजय शर्मा।

जब आप विपक्ष में थे तब संभाग बनाने की बातें जोर-शोर से करते थे। क्या अब नहीं हैं?

मैं आज भी पूरी तरह पक्ष में हूं। माननीय मुख्यमंत्री को आग्रह भी किया है। आने वाले समय में अलवर का संभाग होना जरूरी है। लेकिन पिछली सरकार ने अलवर को तोड़ दिया। फिर भी हमने मुख्यमंत्री से संभाग बनाने की बात रखी है। अलवर नगर विकास न्यास को अनवर प्रधिकरण बनाने के प्रयास में हैं। जो हमारे जिले का बंटवारा हुआ नहीं होना चाहिए। जिन जिलों को बांटा गया है वहां उनसे भी पूछेंगे कि तो उनकी भी यही प्राथमिकता है।

लोग कह रहे है कि एक जिले का नाम भर्तृहरि रखना की बजाय अलवर संभाग का नाम भर्तहरि रखना चाहिए था?

देखिए, ये राज्य सरकार का मामला है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निर्णय हुआ है। कांग्रेस नेताओं से कहना चाहता हूं कि उनको राम के अस्तित्व को नकारा। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में निमंत्रण होने के बावजूद नहीं गए। भर्तृहरि बाबा अलवर के ही नहीं बल्कि पूरे देश के लोक देवता हैं। ऐसे में भर्तृहरि नगर बनाकर सरकार ने अच्छा निर्णय किया है। आने वाले समय में भर्तृहरि की कृपा बनी रहे।

विपक्ष के नेताओं को पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने गाना गाकर जवाब दिया और आपके कई बार डांस सामने आते हैं। ये विपक्ष को जवाब देने का तरीका नया है?

देखिए, राजस्थान में विपक्ष है ही नहीं। वो केवल विरोध करने के लिए विरोध करते हैं। उनकी कोई नीति नहीं है। उनको विपक्ष की भूमिका सक्रिय होकर करनी चाहिए। सारगर्भित सुझाव आने चाहिए। जनता के हित के मामले आने चाहिए। CTH के मामले में मामले में 10 बार यह कहने को तैयार हूं कि सरिस्का में सीटीएच क्षेत्र बढ़ा है। कागजों पर साबित करने को तैयार हूं। सीटीएच के जरिए सरिस्का, रणथम्भौर, मुकंदरा सहित अन्य जगहों पर वन्यजीव व वनक्षेत्र सुरक्षित रहेंगे। वहां रह रहे ग्रामीणों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।

सिलीसेढ़ से अलवर पानी लाने की योजना अधर में रह गई?

जब सीएम ने योजना का शिलान्यास कि तो कुछ कांग्रेस के सरपंचों ने मिलकर विरोध किया। मेरा आरोप तथाकथित बड़े पर आरोप है जो अपनेआप को बड़ा मानते हैं। लेकिन पूरा राजस्थान जानता है कि वे बड़े नेता की चमचागिरी कर पद हासिल किया। उन्होंने सरपंचों को उकसाया। लेकिन पूरा विश्वास है कि अलवर की जरूरत है सिलीसेढ़ से पानी लाना। ईआरसीपी को आने में समय लगेगा। दुर्भाग्य से धौलपुर चंबल योजना में अलवर को जोड़ा नहीं गया। इसरोदा को ढोल पिछली सरकार ने पीटा था। उसकी लाइन अब तक दौसा तक नहीं आई है। लेकिन उसका काम आगे नहीं बढ़ाया। सिलीसेढ़ से अलवर पानी लाने का विरोध करने वालों के परिवार भी अलवर में रहते हैं।

क्या अलवर में सिलीसेढ़ का पानी आएगा या नहीं ?

मैं पूरा प्रयास करूंगा। राजी नहीं तो गैर राजी। सिलीसेढ़ का पानी अलवर में आकर रहेगा।

अब सरिस्का में टाइगर लाने की जरूरत है या नहीं ?

सरिस्का टाइगर की नर्सरी बनता जा रहा है। हमारे यहां से दूसरी जगहों पर टाइगर जाएंगे। लेकिन जीन की समस्या है। दूसरी तरफ यहां टाइगर की संख्या काफी बढ़ गई है। हमारे पास उत्तराखंड व एमपी से आने वाले टाइगर मुकंदरा व रामगढ़ विषधारी में भेजे जाएंगे। आने वाले समय में कुंभलगढ़ में टाइगर का भेजा जा सकता है।



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