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अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 11 करोड़ की लागत से बनाए गए सेवन वंडर को तोड़ा जा रहा है। दैनिक भास्कर ने मामले की पड़ताल की। सामने आया कि प्रोजेक्ट में शुरुआत से ही लापरवाही बरती गई। स्वीकृति मिलने से पांच महीने पहले टेंडर जारी कर काम शुरू कर दिया

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पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

15वीं बोर्ड बैठक में 16 जुलाई 2021 को सेवन वंडर के निर्माण की स्वीकृति जारी की गई।

15वीं बोर्ड बैठक में 16 जुलाई 2021 को सेवन वंडर के निर्माण की स्वीकृति जारी की गई।

15वीं बोर्ड बैठक में 16 जुलाई 2021 को मिली थी निर्माण की स्वीकृति

  • 16 जुलाई 2021 को 15वीं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की बोर्ड मीटिंग हुई। इसकी अध्यक्षता स्वायत्त शासन विभाग के सचिव (आईएएस) भवानी सिंह देथा ने की। बोर्ड की वाइस चेयरमेन व नगर निगम मेयर ब्रजलता हाड़ा, वाइस चेयरमेन व सीईओ व कलेक्टर प्रकाश राज पुरोहित, एसीईओ व नगर निगम आयुक्त कुशाल यादव, एडीए कमिश्नर अक्षय गोदारा, नगर निगम उपायुक्त तारामति वैष्णव, स्मार्ट सिटी के चीफ इंजीनियर अनिल विजयवर्गीय व प्रोजेक्ट के चीफ अकाउंट ऑफिसर नीरज मिश्रा मौजूद रहे। विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में डॉ. राजकुमार जयपाल मौजूद रहे। जबकि डॉ. श्रीगोपाल बाहेती गैरहाजिर रहे थे।
  • इस मीटिंग में 27 प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी गई। जिसमें 10.50 करोड़ की लागत से बनने वाले सवन वंडर भी शामिल थे। इसके बाद इसी मीटिंग में 13 प्रोजेक्ट को वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान की गई। जिसमें सेवन वंडर शामिल था।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की ओर से 10 जनवरी 2023 को जारी की गई वर्क प्रोग्रेस रिपोर्ट में कार्य शुरुआत की तारीख 21 फरवरी 2021 बताई गई।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की ओर से 10 जनवरी 2023 को जारी की गई वर्क प्रोग्रेस रिपोर्ट में कार्य शुरुआत की तारीख 21 फरवरी 2021 बताई गई।

स्वीकृति मिलने के 5 महीने पहले शुरू हो गया था काम

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की ओर से 10 जनवरी 2023 को जारी की गई वर्क प्रोग्रेस रिपोर्ट जारी की, जिसमें कार्य शुरुआत की तारीख 21 फरवरी 2021 बताई है। यानी 16 जुलाई 2021 को स्वीकृति मिलने से 5 महीने पहले। कार्य पूरा करने की तिथि 20 फरवरी 2022, लेकिन कार्य पूरा 29 मार्च 2022 को पूरा होना बताया।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की रिपोर्ट में बताया-18 दिसम्बर 2020 को ही इसका टैंडर, तकनीकी बिड 25 जनवरी 2021 को खोली।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की रिपोर्ट में बताया-18 दिसम्बर 2020 को ही इसका टैंडर, तकनीकी बिड 25 जनवरी 2021 को खोली।

18 दिसम्बर 2020 को ही हो गया था टैंडर

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की ओर से 18 दिसम्बर 2020 को ही इसका टैंडर जारी कर दिया था। इसकी तकनीकी बिड 25 जनवरी 2021 को खोल दी गई। बाद में मैं. निरानिया कंस्ट्रक्शन कंपनी जयपुर को 8 करोड़ 95 लाख 88 हजार 990 रुपए का कार्यादेश जारी कर दिया।

एक्स्ट्रा काम दिखाकर वैल्यू बढ़ाई, इसकी नोटशीट भी जारी की गई है।

एक्स्ट्रा काम दिखाकर वैल्यू बढ़ाई, इसकी नोटशीट भी जारी की गई है।

एक्स्ट्रा काम दिखाकर वैल्यू बढ़ाई

भले ही टेंडर नौ करोड़ से भी कम राशि में हुआ। बाद में एक्स्ट्रा काम दिखाकर इसके भुगतान करीब 11 करोड़ 65 लाख 18 हजार 312 रुपए की स्वीकृति चेयरमेन से ली गई।

26 जुलाई 2022 को इस प्रोजेक्ट की फाइल नहीं मिलने की बात का सर्च नोटिस जारी किया।

26 जुलाई 2022 को इस प्रोजेक्ट की फाइल नहीं मिलने की बात का सर्च नोटिस जारी किया।

मूल फाइल ही गुम हुई

स्मार्ट सिटी प्राेजेक्ट के अफसरों ने 26 जुलाई 2022 को इस प्रोजेक्ट की फाइल को गुम होना बताया। याचिकाकर्ता अशोक मलिक ने बताया कि आज तक सुप्रीम कोर्ट में अफसर मूल फाइल पेश नहीं कर सके हैं।

याचिकाकर्ता अशोक मलिक ने कहा- सेवन वंडर के टेंडर पहले ही जारी हो गए। स्वीकृति बाद में जारी की। अफसरों को सूचित कर दिया था कि कि ये वेटलैंड क्षेत्र है, लिहाजा यहां निर्माण नहीं किया जाए। लेकिन कोई सुनवाई नहीं की। भुगतान भी ज्यादा कर दिया। कोर्ट में फाइल पेश नहीं की और गुम कर दी। जो जिम्मेदार अफसर हैं, उनके खिलाफ सरकार कार्रवाई करें। अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो मुझे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पडे़गा। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

भास्कर ने मामले में पक्ष जानने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के सीईओ व जिला कलेक्टर लोक बंधु से सम्पर्क किया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। मैसेज किया, उसका भी जवाब नहीं आया। सेवन वंडर तोड़ने की कार्रवाई अजमेर विकास प्राधिकरण की ओर से की जा रही है। प्राधिकरण के चेयरमेन का चार्ज भी जिला कलेक्टर लोक बंधु के पास ही है।

एडीए की बिना एनओसी कर दिया था निर्माण

अजमेर में सेवन वंडर का निर्माण कार्य करने के लिए अजमेर विकास प्राधिकरण की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र 14 फरवरी 2022 को जारी किया गया। प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव किशोर कुमार की ओर से जारी पत्र में बताया-स्मार्ट सिटी की ओर से 24 अगस्त 2021 के पत्र में रीजनल कॉलेज के सामने स्थित अजमेर थोक तेलियान के खसरा नम्बरान में थीम आधारित पार्क / पब्लिक स्पेस विकसित करने के लिए अनापत्ति चाही गई थी, लेकिन निर्माण एनओसी मिलने से पहले ही शुरू कर दिया गया। सेवन वंडर के कार्य की शुरुआत 21 फरवरी 2021 की गई। कार्य पूरा करने की तिथि 20 फरवरी 2022 थी, लेकिन कार्य पूरा 29 मार्च 2022 को हुआ।

14 फरवरी 2022 को जारी किया गया अनापत्ति पत्र।

14 फरवरी 2022 को जारी किया गया अनापत्ति पत्र।

4 अगस्त को सुनवाई हुई थी, नई डेट तय नहीं आनासागर वैटलैंड और ग्रीन बैल्ट में हुए निर्माण कार्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 4 अगस्त को सुनवाई की डेट थी लेकिन केस लिस्टेड नहीं होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अगली डेट भी नहीं दी गई है। अब तक हुई सुनवाई के बाद कोर्ट के आदेश पर फूड कोर्ट पहले ही ध्वस्त कर दिया गया था। सेवन वंडर के 17 सितम्बर की डेड लाइन है। इसे तोड़ना शुरू कर दिया है। आगामी दिनों में होने वाली सुनवाई में वैटलैंड में करीब 39 करोड़ रुपए खर्च कर बनाए गए पाथवे, ग्रीन बैल्ट में बनेआजाद पार्क व गांधी पार्क में हुए निर्माण काे लेकर सुनवाई होनी है।

यूडीएच मंत्री ने कहा था- जांच कर कार्रवाई करेंगे 8 अप्रैल 2025 को यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा अजमेर आए और यहां अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 142 लाख रुपए की लागत से बनाए गए पार्क का लोकार्पण और 10 करोड़ की लागत से बनने वाली सड़क के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान सेवन वंडर को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि निर्माण गलत हुआ है तो फिर जिस कालखंड में यह काम हुआ, उस कालखंड में कब कैसे किसके प्रस्ताव से काम हुआ, इसकी निष्पक्ष जांच करके आगे की कार्रवाई करेंगे।

तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुभारंभ किया

देश के 100 शहरों को साल 2016 में स्मार्ट सिटी में अजमेर का चयन किया गया। अजमेर में स्मार्ट प्रोजेक्ट के तहत आनासागर झील के किनारे लगभग एक हैक्टर जमीन पर सेवन वंडर तैयार किया गया। इसके निर्माण में करीब 11 करोड़ की लागत आई थी। सेवन वंडर का 13 अगस्त 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुभारंभ किया था।

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