हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में टूटी पड़ी सड़कें।
राज्य सरकार की ओर से 15 सितंबर से शहर चलो अभियान शुरू किया जा रहा है। इससे पहले सवाई माधोपुर में नगर परिषद की ओर से प्री कैंप लगाए गए। इन प्री कैंपों में विभिन्न वार्डों में प्रशासन ने जाकर समस्याओं को जाना। हाल ही में हाउसिंग बोर्ड की तीनों पार्षदों
यह बोले पार्षद
वार्ड नंबर 22 के पार्षद अभयंकर शर्मा बताते हैं कि उनके वार्ड में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। यहां पहले चार सफाई थे। जिसमें तीन पुरुष और एक महिला थी। अब तीन सफाई कर्मचारी हैं। जिसमें से दो महिला और एक पुरूष है।महिलाएं सफाई नहीं करती वो ट्रॉली भी नहीं चलाती है। जिसकी वजह से सफाई व्यवस्था चौपट हो गई है। वार्ड की सड़कें बिल्कुल जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है। वार्ड के पार्कों की चारदीवारी टूटी हुई पड़ी हुई है। जिससे वार्ड के सभी पार्क कूड़ेदान में तब्दील हो चुके हैं। बार बार अवगत कराने के बाद भी हालात नहीं बदले हैं। ऐसे में नगर परिषद की उदासीनता के चलते यह अभियान कोरी खानापूर्ति ही साबित होगा।

हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में टूटी पड़ी पुलिया।
वार्ड नंबर 21 के पार्षद चंदन सिंह नरूका बताते हैं कि उनके वार्ड के जनकपुरी, श्याम वाटिका, तिलक नगर, वैशाली नगर के पूरे इलाके कच्चे है। यहां बारिश के दिनों में कीचड़ की समस्या होती है। नगर परिषद से 150 ट्रॉली मोरम मांगी थी । जबकि परिषद ने केवल 10 ट्रॉली दी थी। इस वार्ड की सफाई व्यवस्था के हाल बेहाल है। पांच साल पहले हाउसिंग बोर्ड के तीनों वार्ड में 20 सफाई कर्मचारी थे, जो अब केवल आठ ही है। पार्षद नरूका बताते हैं कि नगर परिषद ने चार साल में 3000 एलईडी लाइट खरीदी। जिसमें से वार्ड नंबर 21 में चौदह लाइट ही दी गई। उनके वार्ड के जिला अस्पताल सीतामाता रोड तक के लिए 10 से 15 लाइट कई बार लेटर लिखकर मांगी गई। फिर लाईट नहीं मिली है। प्री कैम्प में समस्याओं को लेकर एप्लीकेशन दी थी। जिसपर कोई सुनवाई नहीं हुई थी। ऐसे शहर चलो अभियान से लोगों को फायदा कम ही मिलता दिख रहा है।

पार्षद जिनेन्द्र शर्मा का कहना है कि समस्याओं का समाधान नहीं होने से अभियान असफल होने की संभावना है।
वार्ड नंबर 20 के पार्षद जिनेन्द्र शर्मा का कहना है हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के तीनों वार्डों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बार नगर परिषद को अवगत कराने पर भी हालात नहीं सुधरे हैं। प्री कैम्प में भी लिखित शिकायत देने पर भी सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में अभियान से फायदा होने कम है।
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