कोटा में रावण दहन ठीक से नहीं हो पाया था
कोटा में दशहरे पर रावण दहन ठीक से न होने पर अब बयानबाजी शुरू हो गई है। बीजेपी से कांग्रेस में आए पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा- रावण दहन पर जो हुआ, उससे कोटा की साख पर बट्टा लगा है। उन्होंने मेला समिति और बीजेपी नेताओं पर निशाना साधा। बीजेपी विधा
दरअसल, 2 अक्टूबर को दशहरे पर कोटा में विश्व के सबसे बड़े रावण का दहन होना था। लेकिन रावण का पुतला जल नहीं सका। बाद में दमकल की गाड़ियों की मदद से रावण के पुतले को जलाने की कोशिश की गई। रावण को गिराना पड़ा था। इस पर कांग्रेस नेता पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने निशाना साधा।

दशहरे को देर रात रावण को जलाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
गुंजल- किसी पार्टी का नहीं है मेला
प्रहलाद गुंजल ने कहा- कोटा दशहरा मेला की पूरे देश में पहचान है। दो अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया गया। इस शहर ने सदियों से रावण दहन की परम्परा को निभाया है। कई लोगों की सालों की मेहनत से कोटा का मेला दशहरा राष्ट्रीय स्वरूप को प्राप्त हुआ है। इसके पीछे कोटा के लोगों की मेहनत है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा- ये मेला दशहरा किसी सरकार या पार्टी का नहीं है। ये किसी की बपौती नहीं है। इस मेले का व्यवसायिक लाभ के लिए स्वरूप बिगाड़ कर मॉल बनाया जा रहा है। पहले दशहरा मैदान के स्वरूप से खिलवाड़ किया गया। अब रावण दहन की परम्परा के साथ खिलवाड़ हुआ है।
ऊंचाई तो बना ली, लेकिन जला नहीं पाए
प्रहलाद गुंजल ने कहा- ये कहते हुए दुख है कि रावण ने अपनी ऊंचाई का रिकॉर्ड तो प्राप्त कर लिया, लेकिन दहन के दौरान हुई घटना ने पूरे देश में हमें शर्मसार कर दिया। रावण की ऊंचाई बढ़ने के बाद कोटा या हाड़ौती ही नहीं राजस्थान भर से लोग रावण दहन देखने आए थे। राजस्थान के मुख्यमंत्री तक यहां बैठे थे, लेकिन रात में 9 बजे जलने वाला रावण देर रात 12:00 बजे तक नहीं जलाया जा सका। नगर निगम मेला समिति की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। इस आयोजन को ठीक तरह से किया जा सके। पूरी व्यवस्था करने के बजाय सिर्फ राजनीति की जाती रही। नतीजा पूरे देश में कोटा की साख को बट्टा लग गया। मेले के मूल स्वरूप से खिलवाड़ किया जा रहा है।

कोटा में 233 फीट का रावण बनाया गया था।
संदीप शर्मा ने कहा- मेले दशहरे को भव्य बनाने का बेहतरीन प्रयास
प्रहलाद गुंजल के बयान के बाद भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा- कोटा नगर निगम की तरफ से दशहरे को भव्य बनाने के लिए बेहतरीन प्रयास किया गया है। 233 फीट का रावण पहली बार बनाया गया। सही तरीके से उसे खड़ा भी कर दिया गया। मेले में कई बेहतरीन आयोजन किए गए। पूरे प्रदेश में बारिश की वजह से कई जगह रावण गीले हो गए और जल नहीं पाए। यही स्थिति कोटा में रही कि दहन से एक दिन पहले कोटा में बारिश हुई।
दहन तो आग लगते ही हुआ, किसी के मन में रावण बैठा है
संदीप शर्मा ने कहा- रावण दहन की परंपरा प्रतीकात्मक है। रावण का दहन तो उसमें आग लगते ही हो गया था। अब बारिश की वजह से शुरुआत में पूरा नहीं जल पाया, लेकिन बाद में उसे जला दिया गया था।
संदीप शर्मा ने प्रहलाद गुंजल पर निशाना साधते हुए कहा- यहां का रावण तो फिर भी जल गया। लेकिन अगर किसी के मन में रावण जलता ही रहे तो उसे तो कभी नहीं बुझाया जा सकता। किसी के मन में रावण ही बैठा है तो बैठा रहे। कोटा को बदनाम करने की बजाय यहां जो बेहतरीन काम हो रहे हैं।
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