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जोधपुर के संक्षिप्त दौरे पर आए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एयरपोर्ट पर ही डीसीपी (ईस्ट) अमित जैन की शिकायत मिली। सीएम ने तत्काल ही एक्शन लेते हुए जैन को हटाने के आदेश दे दिए। इसके कुछ ही देर बाद आईपीएस जैन को एपीओ करने का आदेश जारी हो गया। संभवतया यह

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर रात को ही हाथोहाथ जारी हुआ आदेश।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर रात को ही हाथोहाथ जारी हुआ आदेश।

उल्लेखनीय है कि पाल-गंगाणा क्षेत्र के पाक विस्थापित बड़ी संख्या में एकत्र होकर विकास कार्यों की मांग को लेकर जेडीए के बाहर धरने पर बैठ गए थे। सैंकड़ों लोगों की भीड़ ने रास्ता जाम कर दिया। इनकी अगुवाई करने वाले नेताओं ने 3-4 घंटे तक नारेबाजी की और जेडीए के एंट्री गेट को भी बंद कर दिया। जबकि, जेडीए के अधिकारियों ने इनसे कई बार समझाइश का प्रयास करते हुए लगातार विकास कार्य कराने का भरोसा भी दिया। इसके बावजूद माइक पर अनर्गल टिप्पणियां होती रही।

सूत्रों के अनुसार यही बात मुख्यमंत्री तक पहुंच गई थी। एयरपोर्ट पर ही सीएम ने अफसरों को बुलाकर वस्तुस्थिति के बारे में पूछा। तब सामने आया कि जेडीए अधिकारियों ने कई बार डीसीपी (ईस्ट) अमित जैन को इस बारे में बताते हुए अतिरिक्त पुलिस जाब्ता भेजकर भीड़ को हटाने का आग्रह भी किया था।

बताया जाता है कि जेडीए की तरफ से जोधपुर में राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के नेताओं, मंत्रियों के मौजूद होने और मुख्यमंत्री के आने से पहले स्थिति को संभालने को कहा, लेकिन डीसीपी ने उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी और न ही प्रदर्शनकारियों को हटाने में कोई गंभीरता ही दिखाई।

आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर और एसोसिएट प्रोफेसर के बीच हुई थी हाथापाई। (फोटो-AI)

आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर और एसोसिएट प्रोफेसर के बीच हुई थी हाथापाई। (फोटो-AI)

आईआईटी डायरेक्टर-प्रोफेसर में मारपीट का मामला भी पहुंचा

जानकारों की मानें तो जोधपुर आईआईटी के डायरेक्टर और एसोसिएट प्रोफेसर के बीच हुई मारपीट के मामले में भी एफआईआर दर्ज करने में तकरीबन 8 घंटे की देरी हुई थी। इसकी शिकायत भी सीएम तक पहुंची थी। इतना ही नहीं, इस मामले में गलत धाराएं लगाने को लेकर भी बात पहुंची थी।

15 अगस्त को पांच बत्ती चौराहा पर प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर दिया था। (फाइल फोटो)

15 अगस्त को पांच बत्ती चौराहा पर प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर दिया था। (फाइल फोटो)

सीएम सुरक्षा में चूक मामला भी नाकामी

हाल ही में राज्य स्तरीय स्वाधीनता दिवस समारोह जोधपुर में आयोजित हुआ था। उस दिन एक हादसे में छात्र की मौत हो गई थी। उस दरम्यान भी पुलिस को पहले से पता था कि छात्र के परिजन व क्षेत्रवासी रास्ता रोकने की तैयारी में है। इसके बावजूद पुलिस समय रहते स्थिति को संभालने में नाकाम रही। इसी के परिणामस्वरूप मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को वापस लौटने के लिए पांचबत्ती चौराहा की बजाय दूसरे रास्ते से ले जाना पड़ा था। इस घटना की वजह से भी विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर टिप्पणियां की थी।

अड़ियल रवैये से भी नाराज थे कई स्थानीय नेता

सूत्रों के अनुसार, अमित जैन की बालोतरा से जोधपुर तबादला कराने में एक विधायक की सिफारिश पर एक मंत्री ने कराया था। इसके बाद डीसीपी के पास पहुंचने वाले स्थानीय कार्यकर्ताओं को अनावश्यक बाहर इंतजार कराने, उनसे बेरुखी से बात करने, कई अधिकारियों से भी अड़ियल रुख रखने जैसी बातें भी सीएम तक पहले ही पहुंची थी। गुुरुवार को हुए घटनाक्रम की शिकायत मिलने पर सीएम ने एयरपोर्ट पर ही मौजूद पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश को बुलाकर बात की। बताया जाता है कि इनमें से अधिकांश शिकायतों की पुष्टि भी हो गई थी।

बचाव की कोशिशें भी नहीं बदल पाईं सीएम का फैसला

दिलचस्प बात यह है कि एयरपोर्ट पर ही मुख्यमंत्री ने शिकायतों की पुष्टि करके आक्राकम रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे अफसर को तो हटाओ। बताया जाता है कि, तब वहां मौजूद एक मंत्री और एक विधायक ने अमित जैन को बचाने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री अपने फैसले पर अडिग रहे और उन्होंने वहीं बैठे-बैठे ही जयपुर फोन करके निर्देश दिए और कुछ देर में ही जैन को एपीओ किए जाने का आदेश जारी हो गया।



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