चित्तौड़गढ़ में एक परिवार गूगल मैप पर रास्ता देख तीन साल टूटी पुलिया पर चला गया। रात के अंधेरे में रास्ता भटका ये परिवार कुछ टूटी पुलिया के गड्ढे में फंस गया और वेन में सवार 9 लोग बह गए। जैसे-तैसे पांच लोग बाहर निकले। लेकिन, दो महिलाएं और दो बच्चियां
कपासन विधायक अर्जुनलाल जीनगर ने दावा किया है कि जब परिवार इस पुलिया की तरफ जा रहा था तो गांव के लोगों ने रोका। बताया भी ये पुलिया टूटा हुआ है और तीन साल से रास्ता बंद है। लेकिन, गूगल मैप ऑन कर वह रास्ते पर चला गया।
इस हादसे के बाद हम लोगों के मन में गूगल मैप से जुड़े कई सवाल उठने लगे है। क्योंकि, ये आम लोगों की यूटिलिटी का हिस्सा बन चुका है। लोगों के मन में सवाल है क्या गूगल मैप भी गलत रास्ता बताकर भटका देता है ?
या फिर जब तीन साल से जब रास्ता बंद था तो गूगल मैप में ने इंडीकेट क्यों नहीं किया ? क्योंकि गूगल मैप हमें रास्ते से लेकर ट्रैफिक तक की जानकारी देता है? आखिर यह कैसे काम करता है?
देखें कैसे हुआ हादसा…


आइए इस एक्सप्लेनर में जानते है गूगल मैप कैसे काम करता है, कैसे वह टूटे रास्तों को अपडेट करता है ?

सवाल 1: आखिर कैसे काम करता है गूगल मैप, कैसे वो हमें कोई भी लोकेशन डालने पर रास्ता बताता है?
जवाब: गूगल मैप दरअसल सैटेलाइट और ऊपर से ली गई तस्वीरों के माध्यम से पूरी दुनिया का पूरी डिटेल के साथ मैप बनाता है। यह फोन या कंप्यूटर की स्क्रीन पर देखने में भले ही सिर्फ एक क्लिक पर सबकुछ हो जाता है। लेकिन इसके पीछे तमाम चीजें काम कर रही होती हैं।
किसी एक जगह को सटीक ढंग से बताने या वहां तक के रास्ते की जानकारी के लिए गूगल मैप कई जगहों से डाटा लेकर हम तक पहुंचाता है।
हालांकि, गूगल ट्रेड सीक्रेट की वजह से ऑफिशियल रूप से यह कभी नहीं बताता कि वह नेविगेशन के लिए किस तकनीकी का इस्तेमाल करता है। लेकिन, गूगल मैप रास्ता या जगह बताने में जाहिर रूप से जिन चीजों की मदद लेता है उनकी लिस्ट ये रही-
- सैटेलाइट: गूगल मैप दुनिया भर का नक्शा बताने के लिए सैटेलाइट से ली गई फोटोज और जानकारियों का इस्तेमाल करता है। ये सैटेलाइट पृथ्वी की बाहरी कक्षा में सालों साल चक्कर लगाते रहते हैं और हर पल पृथ्वी की बाहरी सतह की हाई क्वालिटी फोटोज भेजते हैं। इन्हीं फोटोज और जानकारियों का इस्तेमाल कर गूगल हमें कहीं का रास्ता या किसी जगह के बारे में जानकारी देता है।
- तस्वीरें लेकर उन्हें एक साथ जोड़ना: गूगल मैप रास्तों की ज्यादा सटीक जानकारी के लिए 360 डिग्री कैमरों का इस्तेमाल करता है। यह कैमरे एक गाड़ी के ऊपरी हिस्से पर लगे होते हैं। इससे वो सड़कों और आसपास के इलाके को चारों तरफ से कैप्चर करता है और उन सब को एकसाथ मिलाकर हम तक किसी जगह या सड़क की जानकारी देता है।
- लोगों का लाइव डाटा: गूगल मैप किसी जगह की ज्यादा सटीक जानकारी के लिए अपने यूजर्स के डाटा का भी इस्तेमाल करता है। यह रियल टाइम डाटा होता है। यानी किसी जगह की ट्रैफिक कंडीशन क्या है, वहां कोई दुर्घटना तो नहीं हुई है? किसी तरह का कंस्ट्रक्शन का काम तो नहीं चल रहा है? इन सबकी जानकारी वो उन यूजर्स के डाटा से लेता है, जिनके डिवाइस की लोकेशन ऑन होती है।
- डाटा प्रोसेसिंग: इन सब डाटा का इस्तेमाल कर सटीक मैप बनाने के लिए गूगल जटिल डाटा प्रोसेसिंग और एनालिसिस का इस्तेमाल करता है। इसमें इमेज रिकॉग्नाइजेशन, मशीन लर्निंग और भूस्थानिक डाटा (geospatial knowledge) एनालिसिस का इस्तेमाल अपनी काम की जानकारियों को निकालने के लिए करता है। इस डाटा प्रोसेसिंग और एनालिसिस से यह सैटेलाइट और स्ट्रीट व्यू कैमरों से कलेक्ट किए गए डाटा में से अपने काम की जानकारियां निकालता है।

सवाल 2: अगर कोई नई सड़क या रास्ता बना है या टूट गया है, तो गूगल मैप उसे कैसे अपडेट करता है?
जवाब: इसका जवाब मिलता है गूगल मैप के काम करने के तरीके में। असल में देखें तो गूगल मैप के डाटा कलेक्ट करने के दो शुरुआती जरिए हैं। पहला गूगल यूजर्स का रियल टाइम डाटा और स्थानीय प्रशासन।
ऐसे में, किसी भी तरह के सड़क के टूटने, बंद होने, पुल के टूटने और बंद होने की जानकारी के लिए वह स्थानीय प्रशासन के वहां बैरिकेडिंग लगाने या टूटने-फूटने की सूचना का सहारा लेता है।
इसके अलावा ऐप पर कंट्रीब्यूट नाम से एक फीचर है, जिसमें कोई भी यूजर इस तरह की जानकारी अपडेट कर सकता है। इसके बाद गूगल मैप उसे वेरिफाई कर ऐप पर अपडेट कर देता है।
ऐसे में इस पुलिया के टूटे जाने की सूचना अगर किसी यूजर ने ऐप पर अपडेट कर दी होती तो भी यह हादसा होने से बच जाता।
इससे भी पहले अगर स्थानीय प्रशासन वहां पुल के टूटे होने का कोई बोर्ड या बैरिकेडिंग कर देता तब भी गूगल इस जानकारी को सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से अपडेट कर देता। लेकिन ऐसा लगता है कि इस मामले में दोनों ही चीजें नहीं हुईं।

सवाल 3: अगर कोई नई सड़क या ब्रिज बना है, तो गूगल ऐप पर कैसे अपडेट होता है?
जवाब: गूगल मैप अपने ब्लॉग में इसकी जानकारी देता है। किसी जगह पर नए कंस्ट्रक्शन या नई सड़क या नए ब्रिज को लेकर भी जानकारी अपडेट होने की वही प्रक्रिया होती है जो किसी सड़क के टूटने के अपडेट होने की होती है।
अगर कोई ब्रिज या फ्लाई ओवर टूट गया है तब या तो कोई यूजर अपडेट कर सकता है या स्थानीय प्रशासन वहां किसी तरह का बोर्ड या बैरिकेडिंग करे। एक बार यह किए जाने पर ही संभव होता है कि गूगल मैप उस जगह को अपने सैटेलाइट इमेज से वेरिफाई करे और ऐप पर अपडेट करे।
रोड सेफ्टी एक्सपर्ट का मानना है कि यह गूगल मैप की तरफ से बड़ी लापरवाही है। यह ऐप बड़ी मात्रा में यूजर्स का डाटा इकट्ठा करता है।
यह ब्रिज पिछले साल बाढ़ में बह गया था। यानी पिछले एक साल से कोई भी इस रास्ते से होकर नहीं गुजरा। फिर गूगल मैप उस रास्ते को कैसे बता सकता है जिस पर एक साल से कोई गया ही नहीं।

सवाल 4: गूगल किन संस्थाओं या एजेंसी से स्थानीय डाटा लेता है?
जवाब: गूगल मैप अपने ब्लॉग्स में दावा करता है कि वह नई सड़कों, फ्लाईओवर या ब्रिज के बनने या टूटने की जानकारी स्थानीय प्रशासन से लेता है।
लेकिन यह साफ नहीं करता कि भारत सरकार या राज्य सरकार की किन संस्थाओं या एजेंसियों के साथ गूगल का ऐसी जानकारी की लेनदेन के लिए समझौता है।
यहां यह भी स्पष्ट नहीं है कि भारत की कोई सरकारी संस्था या एजेंसी गूगल मैप के साथ किसी तरह का डाटा शेयर करती है या नहीं।

सवाल 5: क्या इस तरह के हादसे राजस्थान में पहले भी हुए हैं ?
6 फरवरी 2025: जयपुर में गूगल मैप के भरोसे निकला ट्रेलर ड्राइवर रास्ता भटक गया। गूगल मैप के दिखाए रास्ते पर 18 चक्कों के ट्रेलर को हाईवे के बदले बस्सी के तुंगा गांव के बाजार और तंग गलियों में पहुंचा दिया। हालात ये हो गए थे कि संकरी गलियों में फंसने की वजह से निकलने तक की जगह नहीं बची। ट्रेलर 8 घंटे तक बाजार में फंसा रहा। आखिर में क्रेन की मदद से इस ट्रेलर को निकालना पड़ा।

27 अप्रैल 2025: सीकर में खाटूश्याम जी जाने के लिए गूगल मैप का सहारा ले रही पंजाब नंबर की इनोवा कार ने अचानक ब्रेक लगा दिया। पीछे से आ रहे ट्रक ने इनोवा को टक्कर मार दी, जिससे कार डिवाइडर फांदकर सामने से आ रही दो कारों से टकरा गई। इस एक्सीडेंट में आरएसएस अधिकारी राकेश कुमार व उनका चालक घायल हो गए थे। तीनों कारों में सवार 6 लोगों में से 4 लोग एयरबैग खुलने से जान बच गई थी।
साल 2021:जैसलमेर जिले की पाकिस्तान से सटे सीमा क्षेत्र में गूगल मैप के जरिए रास्ता ढूंढ रहे युवक रेगिस्तान में भटक गए। आधी रात को वे एक सीमा चौकी पर पहुंचे। रात को कार में सवार पांच जनों को देख वहां तैनात बीएसएफ के जवानों ने इनसे पूछताछ की। कार सवार झुंझुनूं के पांच युवकों ने बताया कि वे तनोट माता के दर्शन करने के बाद मोहनगढ़ स्थित अपने एक साथी का खेत देखने गूगल मैप के सहारे रवाना हो गए। लेकिन वे रास्ता भटक गए।

जालोर में हुए हादसे में बस पूरी तरह से जलकर खाक हो गई थी। ये हादसा भी गूगल मैप की वजह से रास्ता भटकने की वजह से हुआ था।
साल 2021: जालोर शहर से 7 किलोमीटर दूर महेशपुरा गांव में जैन समाज के श्रद्धालुओं से भरी बस हाइटेंशन लाइन की चपेट में आ गई थी। इस हादसे में 6 श्रद्धालु जिंदा जल गए। वहीं, 36 से अधिक श्रद्धालु झुलस गए। बस में सवार रहे श्रद्धालुओं ने बताया कि वे नाकोड़ा के बाद मांडोली में दर्शन करने पहुंचे थे। खाना खाने के बाद ब्यावर जाना था। गूगल मैप से ब्यावर जाने का रास्ता देखते हुए बस आगे बढ़ा रहे थे और गलती से महेशपुरा गांव पहुंच गए। इसके बाद यह हादसा हाे गया।
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चित्तौड़गढ़ में गूगल मैप के कारण बनास में बही वैन:3 की मौत, एक महिला लापता, 5 लोगों ने गाड़ी पर चढ़कर बचाई जान

चित्तौड़गढ़ में एक वैन गूगल मैप के कारण बनास नदी की टूटी पुलिया में बह गई। इसमें एक ही परिवार के 9 लोग थे। नदी के बहाव के कारण वैन 300 मीटर तक बह गई।
एक्सीडेंट में एक 4 साल के बच्ची और 2 महिलाओं की मौत हो गई। वहीं, एक महिला अब भी लापता है। हादसा कपासन में राशमी थाना क्षेत्र के सोमी-उपेरड़ा पुलिया पर रात 1 बजे हुआ। पुलिस के अनुसार परिवार के 5 लोगों ने वैन पर चढ़कर जान बचाई। (यहां पढ़ें पूरी खबर)
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