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राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने भरतपुर के कामां में जज के पिता और भाई की हत्या करने वाले बदमाश को गिरफ्तार किया है। आरोपी 15 साल से फरार था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से आरोपी पर 5 लाख रुपए के इनाम रखा गया था। आखिरकार एजी

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एडीजी (क्राइम) दिनेश एमएन ने बताया- कामां के जघन्य हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रवीण उर्फ लाला (43) निवासी नल बाजार, कामां (भरतपुर) को अरेस्ट किया गया है। खूंखार अपराधी प्रवीण उर्फ लाला पर सीबीआई की ओर से 5 लाख रुपए का इनाम घोषित है। पिछले 15 साल से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर बदमाश फरारी काट रहा था।

प्रवीण उर्फ लाला को पकड़ने के लिए एडिशनल एसपी सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। डेढ़ साल तक पुलिस टीम की कोशिश के बाद 19 अगस्त को मुखबिर से मिली। सूचना के आधार पर टीम को दिल्ली और गाजियाबाद के बॉर्डर इलाकों में रवाना किया गया। टीम ने राज्य और राज्य के बाहर कई जगहों पर दबिश दी।

लाखों की आबादी में घूमकर पकड़ा उन्होंने बताया- टीम ने तंग गलियों में प्रतिदिन करीब 20 KM घूमकर लाखों लोगों की आबादी में प्रवीण की पहचान की और उसके ठिकाने का पता लगाया। शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे लोकल पुलिस की मदद से गाजियाबाद स्थित उसके ठिकाने पर दबिश देकर पकड़ लिया।

हत्या के बाद से था फरार दरअसल, 29 जुलाई 2010 को भरतपुर जिले के कामां में तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामेश्वर दयाल रोहिल्ला के परिवार पर हमला किया गया था। पुरानी रंजिश के चलते परसराम, डालचंद, प्रवीण उर्फ लाला और बबलू ने फायरिंग कर जज के पिता खेमचंद रोहिल्ला और भाई गिर्राज प्रसाद की हत्या कर दी थी।

इस हमले में उनके भाई एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद रोहिल्ला, प्रमिला और अंजू भी गोली लगने से घायल हुए थे। इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी प्रवीण उर्फ लाला था, जो हत्या के बाद से फरार था।

राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स की गिरफ्त में आरोपी प्रवीण उर्फ लाला।

राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स की गिरफ्त में आरोपी प्रवीण उर्फ लाला।

हाईकोर्ट ने 2011 में CBI को सौंपी थी जांच राजस्थान पुलिस की ओर से 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किए जाने के बावजूद आरोपी प्रवीण उर्फ लाला पकड़ में नहीं आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मार्च-2011 में हाईकोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

सीबीआई ने इस हत्याकांड में परसराम, प्रवीण उर्फ लाला, डालचंद और पदम सिंह को दोषी माना। इस हत्याकांड के 2 साल बाद आरोपी पदम सिंह और डालचंद को गिरफ्तार कर लिया गया था। सीबीआई ने भी प्रयास किए, लेकिन मुख्य आरोपी पकड़ में नहीं आया। इसके बाद सीबीआई ने मुख्य आरोपी प्रवीण उर्फ लाला और उसके भाई परसराम पर 5-5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया। दोनों भाई प्रवीण उर्फ लाला और परसराम पिछले 15 साल से फरार थे।



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