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मर्डर के एक मामले में लीलाराम और ललित 5 लोगों को पकड़कर 15 दिनों तक उनसे सौदेबाजी करते रहे। इस दौरान आरोपी हेड कांस्टेबल ललित जोशी ने थानाधिकारी लीलाराम बामणिया के कहने पर जमीन के बदले दलाल कैलाश और किशन से 10 लाख रुपए लिए।

उदयपुर के नाई पुलिस थाना क्षेत्र में मर्डर के मामले में 5 निर्दोष लोगों को पकड़कर रिश्वत के रूप में जमीन की रजिस्ट्री करवाने वाले थानाधिकारी और हेड कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया। शनिवार शाम को आईजी गौरव श्रीवास्तव ने आदेश कर दोनों को सस्पेंड किया। दोन

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एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा और डीएसपी सूर्यवीर सिंह राठौड़ इस मामले की विभागीय जांच कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार सामने आया है कि मर्डर के एक मामले में लीलाराम और ललित 5 लोगों को पकड़कर 15 दिनों तक उनसे सौदेबाजी करते रहे। इस दौरान आरोपी हेड कांस्टेबल ललित जोशी ने थानाधिकारी लीलाराम बामणिया के कहने पर जमीन के बदले दलाल कैलाश और किशन से 10 लाख रुपए लिए। हेड कांस्टेबल खुद ने 5 लाख और 5 लाख रुपए एसएचओ लीालाराम बामणिया को दिए। एक माह तक मामले को दबाए रखा।

14 मार्च-2025 को बाबूलाल के मर्डर मामले में 7 मुल्जिम के अलावा 5 निर्दोष नानजी पुत्र गुंजा, नानू पुत्र कमला, धर्मा पुत्र रुपा, वेसा पुत्र रत्ना और खातू पुत्र हुमा को भी पुलिस ने आरोपी बनाया। इन्हें छोड़ने के लिए हर किसी से 2-2 लाख रुपए की डिमांड की गई। गरीब आदिवासियों के पास पैसे नहीं होने पर रिश्वत में उनकी 4.39 बीघा जमीन ले ली गई।

थानाधिकारी लीलाराम ने इलाके के दो दलाल कैलाश और किशन को इनकी जमीन के सौदे के लिए थाने बुलाया। 24 मार्च 2025 को पांचों को पुलिस की सरकारी गाड़ी में बैठाकर उप पंजीयन, कार्यालय बारापाल ले गए। जहां दोनों दलालों कैलाश और किशन ने डमी बाबूलाल के नाम पर करीब 4.39 बीघा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी का रजिस्ट्रेशन करवा दिया।



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