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महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट में गुरुवार सुबह 26 वर्षीय प्रसूता की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों और स्टाफ पर इलाज में लापरवाही के आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। परिजनों ने कहा कि प्रसूता को बुधवार को डिलीवरी के बाद वार्ड में शिफ्ट कर दिया
परिजनों का कहना है कि तरुणा को 19 अगस्त की रात 1 बजकर 12 मिनट पर भर्ती करवाया था। वह खुद चलकर अस्पताल पहुंची थी, लेकिन इलाज दोपहर 12 बजे मिला। बुधवार शाम ऑपरेशन से डिलीवरी हुई। इसके बाद लगातार ब्लीडिंग होती रही, जिसे रोकने के लिए डॉक्टर व स्टाफ ने कुछ नहीं किया। ऐसे में आईसीयू में शिफ्ट करना था, लेकिन वार्ड में कर दिया। देर रात अचानक महिला की तबीयत बिगड़ी और वह दर्द से तड़पने लगी। आखिरकार गुरुवार सुबह मौत हो गई।
पति बोला पत्नी तड़पती रही, मुझे अंदर नहीं जाने दिया
पति विनोद ने आरोप लगाया कि मेरी पत्नी दर्द से तड़पती रही, लेकिन मुझे सुरक्षा गार्ड ने पुरुष का हवाला देते हुए अंदर नहीं जाने दिया। स्टाफ ने इलाज करने की बजाय बार-बार परेशान किया। हमने बार-बार स्थिति जानने के प्रयास किए, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने चुप रहने के लिए कहता रहा और इलाज नहीं किया गया, जिससे तड़प-तड़प कर उसने दम तोड़ दिया, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा।
मामला गंभीर, जांच कराएंगे, दोषी पर कार्रवाई होगी : डॉ. माहेश्वरी मौत की सूचना पर परिजनों ने हंगामा किया तो अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया। इसके बाद शव एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। मामले में जब सांगानेरी गेट अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशा वर्मा को मोबाइल लगाया तो फोन स्विच ऑफ मिला। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी का कहना है कि गंभीर मामला है। इसकी जांच करवाई जाएगी, जो भी जांच में दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
लगातार हो रही थी ब्लीडिंग
परिजनों के अनुसार डिलीवरी के बाद महिला को लगातार ब्लीडिंग हो रही थी, जिसे रोकने के लिए वहां मौजूद डॉक्टर व स्टाफ ने कुछ भी नहीं किया, जिससे महिला की डीआईसी में जाने से मौत हो गई। मृतका के पति ने बताया कि ऑपरेशन के बाद आईसीयू की बजाय वार्ड में शिफ्ट करना भी लापरवाही है। पति ने आरोप लगाया कि उन्होंने डॉक्टर व स्टाफ से आईसीयू में शिफ्ट करने व सहीं इलाज की गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
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