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अब प्रदेशभर के स्कूलों में चातुर्मास में विशेष प्रवचन, योग, ध्यान शिविर और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, धर्मों का सम्मान, स्वास्थ्य, अहिंसा, संयम और करुणा जैसे मूल्यों का विकास करना है। योग, ध्यान, प्
परिषद अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया कि यह पहल विद्यार्थियों को नशा, हिंसा और तनाव से दूर रखेगा और एक संतुलित और संस्कारयुक्त जीवन की ओर प्रेरित करेगा। विद्यार्थियों को आयुर्वेद, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के लिए भी जागरूक किया जाएगा।
अवसाद और एकांकीपन को दूर करने का प्रयास
वर्तमान समय में विद्यार्थी आधुनिकता और शहरीकरण के दबाव में भारतीय संस्कृति व मूल्यों से दूर हो रहे हैं। शिक्षा में प्रतिस्पर्धा और भौतिकता के कारण विद्यार्थियों के जीवन में तनाव, नशे की प्रवृत्ति, अवसाद और एकांकीपन बढ़ रहा है। ऐसे में परिषद ने सरकार को सुझाव दिया था कि विद्यार्थियों को समय-समय पर भारतीय संस्कृति, अहिंसा, करुणा और संयम के मूल्यों की जानकारी दी जाए। शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-अनुशासन, ध्यान और अध्यात्मिक विकास के लिए विशेष प्रवचन और कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। अब इन सुझावों को सरकार ने मान लिया है।
“सरकार की पहल सराहनीय है। जैन संतों के प्रवचन से सकारात्मकता की अनुभूति व मार्गदर्शन प्राप्त होगा, जिससे बच्चे अवसाद से बाहर आएंगे। समाज के प्रति कर्तव्य का निर्वहन कर सकेंगे।” -श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र
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